अक्षत में ऐसी प्रतिभा कि सिंड्रोम भी डाउन; 1300 दीयों पर बिखेरी कला की रोशनी, आत्मनिर्भरता की ओर कदम

डाउन सिंड्रोम से पीड़ित एक युवक ने एक प्रशिक्षण केंद्र में सीखी कला को अपनाते हुए दिवाली पर कलात्मक दीये तैयार किए हैं। अब तक वह करीब 1300 दीये सजाकर बेच भी चुका है। उनके सजाए दीये रिश्तेदार भी पसंद कर रहे हैं। यही नहीं अब ऑर्डर भी आना शुरू हो गए हैं।

19 साल के अक्षत डाउन सिंड्रोम से पीड़ित हैं। उनकी मम्मी आरती घोडगावकर ने बताया कि अक्षत ने नासिक में वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर में दीये बनाना सीखा था। लॉकडाउन की वजह से हम इस साल उसे नासिक नहीं ले जा पाए। यहां कोई क्लास भी ज्वॉइन नहीं की। खाली समय में वह ऊब महसूस कर रहा था। तब ये विचार आया कि क्यों ने दिवाली के दीये सजाए जाएं। चूंकि वह दीये डेकोरेट कर चुका था, एक प्रदर्शनी में उसके दीये काफी पसंद किए गए थे, इसलिए दीये सजाना शुरू किया।

सौ दीये तैयार करने से की थी शुरुआत, चार दीयों के पैकेट की कीमत 40 रुपए
बाजार जाकर दीये का चुनाव, कलर और डेकोरेशन का सामान भी अक्षत खुद ही खरीदता है। एक दिन में 50-60 दीये डेकोरेट कर लेता है। शुरुआत सौ दीयों से की थी, सोशल मीडिया स्टेटस पर फोटो अपलोड किए, जिसका अच्छा रिस्पॉन्स मिला। चार दीयों का एक पैकेट बनाया है, जिसकी कीमत 40 रुपए है।

डाउन सिंड्रोम में चीजों को समझने में होती है दिक्कत
(डाउन सिंड्रोम को ट्राइसोमी 21 के नाम से भी जाना जाता है। बच्चों को चीजों को समझने में दिक्कत, शारीरिक विकास में देरी डाउन सिंड्रोम के लक्षण हैं। यह आनुवंशिक विकार है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे पीड़ित बच्चों में सीखने की क्षमता कम होती है और उनमें व्यवहार संबंधी समस्याएं भी होती हैं।)

आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य
मां के अनुसार अक्षत को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयत्न है, इसलिए इस काम से शुरुआत की। उसकी पहली कमाई है और वह बहुत खुश है। इससे आत्मविश्वास बढ़ेगा।

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19 साल के अक्षत डाउन सिंड्रोम से पीड़ित हैं। उन्होंने दिवाली पर दीये डेकोरेट किए हैं।

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