अष्टमी पर खेरमाई मंदिर में सुबह से दर्शन के लिए लगी भक्तों की कतार, महागौरी स्वरूप में किया श्रृंगार

एक हजार वर्ष पुराने शहर के सबसे प्रसिद्ध बड़ी खेरमाई मंदिर में सुबह छह बजे से ही श्रद्धालुओं का तांता लग गया। अष्टमी के चलते मूर्ति का महागौरी स्वरूप में श्रृंगार किया गया है। नवरात्र के नौ दिन यहां मां के विभिन्न स्वरूप के अनुसार श्रृंगार की परम्परा रही है। अष्टमी पूजन के लिए महिलाएं, पुरुष और बच्चे सुबह से कतार में लग गए थे। सैनिटाइजेशन के लिए जगह-जगह व्यवस्था की गई है। लोगों से मास्क लगाकर ही मंदिर में प्रवेश के लिए ताकीद की जा रही थी।
नौ स्वरूप में विराजमान हैं मां
बड़ी खेरमाई मंदिर में मुख्य प्रतिमा के साथ ही उनके नौ स्वरूप भी विराजमान हैं। उनके स्वरूप के अनुसार ही उनका श्रृंगार किया गया है। सोने और चांदी के आभूषण मां को पहनाएं गए हैं। मंदिर के पुजारी पंडित दिनेश तिवारी ने बताया कि सप्तमी, अष्टमी और नवमीं को मां की विशेष श्रृंगार के साथ भव्य महाआरती होती है। कोरोना के बावजूद लोगों की श्रद्धा भारी पड़ रही थी। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए लोगों को एक-एक कर मंदिर में प्रवेश दिया जा रहा था। लाइन में महिलाएं, बच्चे और पुरूष उत्साह में मां के जयकारे लगाते जा रहे थे।
मंदिर में बना है अस्थाई पुलिस चौकी
मंदिर प्रांगण में ही एक अस्थाई चौकी बनायी गई है। यहां निरीक्षक स्तर के एक अधिकारी सहित 20 आरक्षकों की तैनाती की गई है। पूरे मंदिर में 27 सीसीटीवी कैमरों से नजर रखी जाती हैं। मुख्य प्रतिमा तक जाने की किसी को अनुमति नहीं दी गई। गर्भगृह को चारों ओर पॉलिथीन की सुरक्षा लगाई गई है।
मंदिर का ये है इतिहास-
भानतलैया बड़ी खेरमाई मंदिर 10-11 वीं शताब्दी का है। यह मंदिर कल्चुरी काल के शासकों की कुलदेवी हैं। मान्यता है कि यहां भक्तों की सभी मनोकमानाएं पूर्ण होती हैं। कल्चुरी कालीन में राजा जाजल्य देव ने तापस मठ की स्थापना की थी। मंदिर में पहले प्राचीन प्रतिमा शिला के रूप में थी, जो वर्तमान में प्रतिमा के नीचे के भाग में स्थापित है। मंदिर में जवारा विसर्जन की परम्परा भी है, जो वर्ष 1652 की चैत्र नवरात्र से शुरू हुई। यहां सप्तमी, अष्टमी और नवमी को रात में मातारानी की महाआरती होती है। इसमें कई शहरों से लोग पहुंचते हैं। नवरात्र में यहां मां के नौ रूपों का श्रृंगार किया जाता है। अस्ष्टमी को मां गौरी के रूप में श्रृंगार किया गया है। यह मंदिर 52 गुप्त शक्तिपीठों में शामिल है। मंदिर की आस्था ही है कि लोग दूर-दूर से पूजन करने आते हैं।
मंदिर में इस तरह प्रतिमाओं की है स्थापना
खेरमाई के गर्भगृह में स्थापित माता की प्रतिमा के बायीं ओर संकटमोचक दक्षिणमुखी हनुमान और दायीं ओर तांत्रिक शक्ति के प्रतीक भैरव की प्रस्तर मूर्ति है। श्रद्धालु श्रद्धा भाव से मंदिर के परकोटे की परिक्रमा करते हैं। यहां देवी दुर्गा, शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री के स्वरूप में विराजमान हैं।
शहर के इन मंदिरों में भी सुबह से लगी श्रद्धालुओं की भीड़
शहर में इसके अलावा त्रिपुरी सुंदरी, शारदा मंदिर बरेला, मदनमहल कालीमठ, बगलामुखी मंदिर, सदर काली मंदिर में सुबह से श्रद्धालु पहुंचने लगे थे। सभी मंदिरों में मास्क और सेनेटाइजेशन के साथ ही प्रवेश की अनुमति दी गई है। हर मंदिर में सुरक्षा के लिए पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई है।
रोड संकरा होने के चलते ट्रैफिक किया डायवर्ट
बड़ी खेरमाई मंदिर का भानतलैया और हनुमान ताल तालाब वाली रोड संकरी है। पार्किंग न होने से श्रद्धालुओं के दो पहिया वाहन रोड पर ही पार्क किए जा रहे थे। पुलिस ने दोनों छोर पर स्टॉपर लगाकर बड़े वाहनों का प्रवेश रोक दिया था।

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बड़ी खेरमाई मंदिर में मुख्य प्रतिमा के साथ ही उनके नौ स्वरूप भी विराजमान हैं।

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