चार जिंदा दिल दोस्त एक दूसरे के लिए मर मिटते थे, फोन कर बोले थे घर आ रहे हैं फिर कभी नहीं लौटे

सड़क हादसे में डबरा के चार दोस्तों की मौत हो गई है। इनके बारे में पता लगा है कि यह चार ऐसे दोस्त थे जो एक दूसरे पर मर मिटते थे, लेकिन कभी साथ नहीं छोड़ते थे। किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि वो इस तरह एक साथ दुनिया छोड़ जाएंगे। रविवार रात 9 बजे ग्वालियर से निकलते समय सभी ने अपने-अपने घर कॉल कर बोला था कि वह कुछ ही देर में आ रहे हैं, फिर वह कभी लौटे ही नहीं। रात 11 बजे तक नहीं आए तो परिजन ने कॉल करना शुरू हुए। दो के मोबाइल बंद थे और दो के मोबाइल पर कॉल तो लगा पर रिसीव नहीं हुआ। इसके बाद परिजन ने छानबीन शुरू की। करीब 2 घंटे तलाश करने के बाद जौरासी पर एक हादसे का पत लगा और परिजन वहां पहुंचे। जिसके बाद पूरी घटना का पता लगा।

कार्तिक को मृत घोषित कर देने के शव को ले जाते परिजन

हादसे के समय कार्तिक चला रहा था गाड़ी

कार्तिक पालीवाल का सोमवार को जन्मदिन था जिसकी पार्टी वह रविवार को करने के लिए ग्वालियर आए थे। यहां एक दोस्त के फ्लैट पर जश्न मनाया। इसके बाद वह रात को घर के लिए निकले। कार एमपी07 सीएफ-5680 कार्तिक की मां नीलम के नाम है। इस गाड़ी को कार्तिक ही चला रहा था। ऐसा बताया जाता है कि वह ग्वालियर से निकलते ही तेज रफ्तार में थे। जौरासी घाटी पर एक अन्य तेज रफ्तार कार ने चालक वाली तरफ कट मारा है। जिससे तेज रफ्तार कार कार्तिक पर नहीं संभली और गाड़ी जौरासी घाटी में जा गिरी। इस हादसे में चारों दोस्तों की मौत हो गई है। हादसा कितना खतरनाक है उसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कार खाई में ऐसी गिरी है कि उसकी डिक्की तक अलग हो गई है।

नवजोत के पिता ले गए शव, नहीं कराया पोस्टमार्टम

घटना के बाद नवजोत के पिता धर्मजीत सिंह ग्वालियर पहुंचे। उन्होंने अपने बेटे के शव का पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया। पुलिस ने उन्हें समझाया भी, लेकिन वह नहीं माने और नवजोत का शव लेकर डबरा के लिए रवाना हो गए।

पत्नी मायके से पूछ रही वो ठीक तो हैं न

मृतक कार्तिक के बारे में बताया गया है कि दस माह पूर्व ही उसकी शादी हुई थी। उसकी पत्नी अभी मायके में है, हादसे का पता चलते ही पत्नी भी डबरा के लिए रवाना हो गई है। पर उसे बताया नहीं गया है कि कार्तिक की हादसे में मौत हो गई है। उसे घायल होने की खबर दी गई है। वह बार-बार परिवार के लोगों से पूछ रही है कि वह कार्तिक ठीक तो है न, उसे ज्यादा तो नहीं लगी।

हमें तो अभी भी विश्वास नहीं हो रहा

मृतक शिवम शर्मा के पिता राजेन्द्र शर्मा पीडब्ल्यूडी में एसडीओ हैं। चाचा वीरेन्द्र शर्मा मीडिया जगह के चर्चित नाम हैं। अभी वह भोपाल में हैं। चचेरे भाई सोमेश ने बताया कि रात को करीब दो घंटे तक हम उन्हें तलाशते रहे। मोबाइल पर घंटी तो जा रही थी, लेकिन रिसीव नहीं हो रहा था। आखिर में जौरासी पहुंचे तो घटना का पता लगा। हमें तो अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि यह क्या हो गया है। पर इन चारों की दोस्ती डबरा में उदाहरण थी

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जौरासी घाटी में पड़ी दुर्घटनाग्रस्त कार

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