जबलपुर के मोहास में सुबह मृत मिला एक हाथी, वन विभाग का अमला पहुंचा, ओडिशा से अप्रैल में आए थे कान्हा

कान्हा के जंगल से भटक कर जबलपुर पहुंचे दो हाथियों में एक शुक्रवार सुबह नौ बजे बरगी के मोहास में कैनाल के पास मृत मिला। दूसरे हाथी का भी पता नहीं चल रहा है। हाथी की मौत की खबर मिलते ही डीएफओ सहित वन अमला मौके पर पहुंच गया। हाथी की मौत की खबर पूरे क्षेत्र में आग की तरह फैल गई। हजारों की संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे हैं। बरगी पुलिस ग्रामीणों को दूर रखने के प्रयास में जुटी है। हाथी की मौत कैसे हुई, ये स्पष्ट नहीं हो पाया है। उसके शरीर पर कहीं कोई चोट के निशान नहीं मिले हैं। वेटरनरी के चिकित्सकों से हाथी का पीएम कराया जाएगा। इसके बाद ही मौत के कारणों का पता चलेगा।

और बिछड़ गई राम-बलराम की जोड़ी

अप्रैल में भटक कर कान्हा पहुंचा था 20 हाथियों का झुंड
ओडिशा से अप्रैल में 20 हाथियों का झुंड भटक कर कान्हा पहुंचा था। सितंबर में इनका पलायन सिवनी से मंडला के जंगलों की ओर हुआ। दो महीने तक वे मंडल के जंगल में ही रहे। इसके बाद दो हाथी भटक कर नर्मदा तीरे-तीरे जबलपुर की ओर बढ़ गए। वहीं झुंड के अन्य हाथी वापस कान्हा की ओर लौट गए। चार दिन पहले दोनों हाथियों ने बरेला क्षेत्र में प्रवेश किया था। तब से वन विभाग के 25 सदस्यों की टीम उनकी निगरानी में लगाई गई थी। बुधवार को दोनों हाथी बरगी में पहुंचे थे। वहां से दोनों गुरुवार को ग्वारीघाट के दूसरी ओर मंगेली में देखे गए थे।
शुक्रवार सुबह नौ बजे मृत मिला एक हाथी
दोनों हाथी मंगेली से बरगी कैनाल के रास्ते आगे नरसिंहपुर की ओर बढ़ रहे थे। शुक्रवार सुबह नौ बजे मोहास में ग्रामीणों ने कैनाल से थोड़ी दूरी पर एक हाथी को मृत देखा। तुरंत इसकी सूचना बरगी थाने को दी गई। पुलिस ने वन विभाग को खबर दी। मौके पर डीएफओ अंजना सुचिता तिर्की सहित अन्य अधिकारी रवाना हो गए हैं। हाथी के शव के चारों ओर एक घेरा बना दिया गया है। इसमें किसी को प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई है।

मंगेली में गुरुवार को दिखे थे दोनों हाथी आखिरी बार साथ

खनन के चलते कम हो रहे वन क्षेत्र से पलायन
डीएफओ अंजना सुचिता तिर्की के मुताबिक ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ के जंगल में ही हाथी दिखते थे। वहां से वे निकल कर आबादी क्षेत्र में पहुंच जाते थे। पहली बार ये हो रहा है कि उनका पलायन एमपी की ओर हुआ है। माना जा रहा है कि इन राज्यों में बढ़ते खनन से जंगलों का दायरा सिमट रहा है। इस कारण हाथी नए रहवास की खोज में पलायन करने पर विवश हुए हैं।
अब बढ़ा खतरा
रेंजर एमएल बरकड़े के मुताबिक एक हाथी की मौत के बाद अब खतरा बढ़ गया है। साथी की मौत से दूसरा हाथी बेकाबू हो सकता है। ऐसे में ग्रामीणों को अधिक सावधान रहना होगा। अधिकारियों से चर्चा के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा कि हाथी का रेस्क्यू कर सुरक्षित कान्हा छोड़ा जाएगा या फिर उसे ऐसे ही आगे बढ़ने दिया जाएगा।

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जबलपुर के मोहास में मृत मिला एक हाथी

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