दुष्यंत कुमार की कविता हो गई:रेल गाड़ी 110 किमी प्रतिघंटे की स्पीड से गुजरी, स्टेशन की 14 साल पुरानी बिल्डिंग पहले तो थरथराई, फिर भरभराकर गिर गई