महाकाल मंदिर के नीचे मिला एक हजार साल पुराना मंदिर; केंद्रीय दल ने कहा- खुदाई से नया इतिहास सामने आने की उम्मीद

पुरातत्व विभाग की केंद्रीय टीम महाकाल मंदिर परिसर में मिले पाषाण का अवलोकन करने पहुंची। दल में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मंडल भोपाल के अधीक्षण पुरात्तव विद डॉ पीयूष भट्ट व खजुराहो पुरातत्व संग्रहालय के प्रभारी के के वर्मा शामिल हैं। केंद्रीय पर्यटन मंत्री प्रह्लाद पटेल के निर्देश पर यह टीम पहुंची है।

प्रारंभिक निरीक्षण के बाद दिल्ली से आई विशेषज्ञों की टीम में शामिल डॉ. भट्‌ट ने भास्कर को बताया प्राचीन अवशेष की बनावट और उसकी नक्काशी देखकर यह दसवीं और ग्यारवीं शताब्दी का मंदिर लग रहा है। अगली खुदाई देखकर करनी होगी ताकि अवशेष ना रहे। उम्मीद जताई है कि इससे उज्जैन और महाकाल से जुड़ा नया इतिहास पता चलेगा।

अंदर दबे मंदिर की सीमा कहां तक, अभी तय नहीं

उज्जैन मैं मिले मंदिर से कई ऐसी बातें सामने आ सकती है जिनसे महाकाल मंदिर और इस पूरे क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व का पता चलेगा। अभी विशेषज्ञों की टीम मंदिर परिसर में हर एक चीज का बारीकी से जायजा ले रही है और कोशिश है कि किसी भी पुरातात्विक महत्व की धरोहर को नुकसान न पहुंचे। पीयूष भट्‌ट ने बताया अभी नहीं कह सकते कि यह प्राचीन दीवार और मंदिर कहां तक है। प्रारंभिक निरीक्षण किया है।

आगे क्या

विशेषज्ञों ने बताया आगे मंदिर के समिति और प्रशासन को ही निर्णय लेना है कि पुरातात्विक धरोहर को संरक्षित किया जाएगा। हमने सर्वे कर लिया है, उस आधार पर जानकारी प्रदान की जाएगी।

रोक रखा हुआ है काम

गौरतलब है कि महाकालेश्वर मंदिर परिसर में परमार कालीन पुरातन अवशेष मिले हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक ये परमार काल के किसी मंदिर का आधार (अधिष्ठान) है। यहां विस्तारीकरण के लिए चल रही खुदाई के दौरान जमीन से करीब 20 फीट नीचे पत्थरों की प्राचीन दीवार मिली। इन पत्थरों पर नक्काशी मिली है। इसके बाद खुदाई कार्य रोक दिया गया था।

मंदिर विस्तार के लिए सती माता मंदिर के पीछे सवारी मार्ग पर जेसीबी से खुदाई की जा रही थी। इसी दौरान आधार मिला है। इसके बाद काम रोक दिया गया था। विक्रम विश्वविद्धालय के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययनशाला के विभागाध्यक्ष डॉ. राम कुमार अहिरवार का कहना है कि अवशेष पर दर्ज नक्काशी परमार कालीन लग रही है। ये करीब 1000 वर्ष पुरानी हो सकती है।

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बुधवार को पुरातत्व विभाग की केंद्रीय टीम पाषाण का अवलोकन करने पहुंची।

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