हाथों को सैनिटाइज करने के बाद एंट्री, परिजन बोले- भविष्य के लिए स्कूल भेज रहे, टीचर बोले – शेयरिंग नहीं करना

सुबह 10 बजे टीचर स्कूल परिसर में आना शुरू हो गए थे। हर क्लास के सामने सैनिटाइजर की बोतल रखी थी। पानी पीने वाले स्थान पर हैंड वॉश रखा था। कुछ देर बाद बच्चे परिजन के साथ स्कूल आते दिखाई दिए। ज्यादातर परिजनों के हाथ में एक कागज था। परिसर में खड़े व्यक्ति ने सबसे पहले सभी को हाथ धोने को कहा। इसके बाद सैनिटाइजर देकर उन्हें भीतर भेज दिया। यह नजारा था सुबह जंजीरवाला चौराहे स्थित स्वामी विवेकानंद शासकीय आदर्श उच्चतर विद्यालय का, जो 8 महीने बाद सरकार के आदेश पर खुला है। यहां 10वीं और 12वीं की कक्षाएं शुरू हो गई हैं।

एक-एक कर परिजनों से बात कर सहमति पत्र लिया गया।

लंबे समय बाद खुलने से स्कूल में भी कोरोना से बचाव को लेकर तैयारी थी। स्कूल पहुंचे परिजन भीतर कॉरिडोर में कुर्सी पर बैठे टीचर के पास पहुंचे। यहां टीचर एक-एक कर परिजनों को बुलाते रहे और पहले उनसे सहमति पत्र मांगा। स्कूल भेजने के लिए मिले सहमति पत्र के बाद टीचर ने परिजनों और बच्चे से क्षेत्र और पड़ोस में कोरोना की स्थिति के बारे में पता किया। बच्चों के साथ ही परिजनों से पूछा कि आपको पिछले 7 दिनों में बुखार या सर्दी-खांसी तो नहीं हुई थी। अभी पड़ोस मोहल्ले में कोरोना पॉजिटिव तो नहीं है।

क्लास में भी बच्चों को सबसे पहले कोरोना बचाव को लेकर जानकारी दी गई।

इसके बाद टीचर ने बच्चे और परिजन को कोरोना को लेकर सावधानियां रखने को भी कहा। उन्होंने बताया कि यदि आपको घर में बुखार लग रहा हो, तो बिल्कुल भी स्कूल नहीं आएं। यदि स्कूल में किसी प्रकार की समस्या लगे, तो तत्काल टीचर को बताएं और घर चले जाएं। इसके बाद पैरेंट्स को घर रवाना कर दिया गया। वहीं, बच्चों के हाथों को सैनिटाइज करवाकर क्लास में जाने को कह दिया गया। इसके बाद सबसे पहला लेक्चर प्रिंसिपल का हुआ। उन्होंने फिर से बच्चों को कोरोना के बारे में बताया और स्पष्ट किया कि ना तो आपको किसी का पेन लेना है, ना ही किसी की कॉपी को टच करना है। कुछ भी एक-दूसरे से शेयर नहीं करें।

कुछ बच्चे अपने साथ सैनिटाइजर लेकर आए थे। स्कूल में भी हाथ साफ करवाए गए।

बच्चे बोले – स्कूल में होती है प्रॉपर पढ़ाई

    • प्रिंसिपल बेला टंडन ने बताया कि गुरुवार को ही टीचरों ने सोशल मीडिया के जरिए क्लास शुरू होने की जानकारी परिजनों और बच्चों तक पहुंचा दी थी। इसमें कहा गया था कि पूरी सावधानी और सहमति पत्र के साथ बच्चों को स्कूल में आना है। यदि परिवार में किसी को भी सर्दी-खांसी या बुखार है, तो स्कूल नहीं आएं। बच्चा स्कूल में हाथ धोकर ही भीतर आएगा। इसके बाद उसे हाथों को सैनिटाइज करना है। परिसर से लेकर क्लास रूम तक सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाया गया। बच्चों में थोड़ा डर है, इसलिए उम्मीद के अनुसार स्ट्रेंथ नहीं थी। टीचर उन्हें लगातार गाइड लाइन दे रहे हैं।
    • पैरेंट्स ने कहा कि कोरोना को लेकर डर तो है, लेकिन स्कूल भी जरूरी है। बच्चों के भविष्य के लिए स्कूल भेज रहे हैं।
    • 12वीं के छात्र कुणाल ने बताया कि काेराेना को लेकर डर तो लगा, लेकिन स्कूल आने से पढ़ाई में फर्क पड़ता है। आनॅलाइन पढ़ाई के जरिए काफी कुछ कोर्स तो हो गया है। अब स्कूल आकर इसकी अच्छे से तैयारी करनी है।
    • 12वीं की छात्रा अनुशिका ने कहा – घर पर प्रॉपर पढ़ाई नहीं हो पा रही थी। डर है, पर स्कूल आएंगे।

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    लंबे समय बाद स्कूल पहुंचे बच्चों के हाथ पहले सैनिटाइज करवाए गए।

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