28.70 लाख रुपए वसूल चुके थे, खाता फ्री और बरी कराने के 20 लाख और मांगे थे पुलिस वाले

साइबर केस के नाम पर अवैध वसूली में बुरी तरह फंसे जबलपुर पुलिस के कारनामें सामने आने लगे हैं। नोएडा से जुड़े साइबर फ्रॉड मामले को रफा-दफा करने के एवज में 28.70 लाख रुपए वसूलने के बाद 20 लाख और मांग रहे थे। आरोपी पुलिस वालों ने शिकायतकर्ता को भी ठगी के इस प्लान में शामिल कर लिया था। यूपी पुलिस द्वारा मामला उजागर करने के बाद अब एमपी पुलिस ने पूरे मामले में प्राथमिक जांच के आदेश दिए हैं। यूपी पुलिस द‌वारा एमपी के दो एसआई और एक आरक्षक समेत पांच लोगों को अरेस्ट किया है।

नोएडा पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपी पुलिस वाले
नोएडा पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपी पुलिस वाले

गए थे मैट्रिमोनियल मामले की जांच के बहाने
नाेएडा के सेक्टर-20 थाना की पुलिस गिरफ्त में आए जबलपुर स्टेट साइबर सेल के एसआई पंकज साहू, एसआई राशिद परवेज खान व आरक्षक आसिफ अली मैट्रिमोनियल मामले की जांच के बहाने 15 दिसंबर को ट्रेन से निकले थे। मैट्रिमोनियल से 2018 में 15 लाख की ठगी मामले में आरोपी प्रदीप कुमार की गिरफ्तारी हुई थी। तीन आरोपी नोएडा व दिल्ली के अभी फरार चल रहे हैं। 173 (8) में चालान पेश हो चुका है। पर वहां वे पोंजी स्कीम के तहत हुए 54 हजार की ठगी मामले में सौदा करने लगे।
ये है पूरा मामला
27 अक्टूबर को जबलपुर निवासी चंद्रकांत दुबे ने शिकायत की कि पोंजी स्कीम के झांसे में फंसाकर उनसे 54 हजार की ठगी हुई है। चंद्रकांत दुबे को सायबर फ्रॉड करने वालों ने सस्ते में साफ्टवेयर डेवलप करने का झांसा दिया था। इस मामले में अभी एफआईआर तक दर्ज नहीं है। साइबर सेल ने प्रकरण की जांच के बाद नोएडा के सेक्टर 18 स्थित आईसीआईसीआई बैंक का खाता सीज कराया था। इस खाते में कुल 58 लाख रुपए हैं। खाते को फ्री कराने और मामले में आरोपी को बरी कराने के एवज में रिश्वत मांगे थे। आरोपित के खाते से रकम निकलवाने से पहले एसआई की सर्विस पिस्टल लूट ने उगाही के पूरे घटनाक्रम को सामने ला दिया।
आजमगढ़ के रहने वाले हैं जालसाज
तीनों पुलिस कर्मियों के साथ गिरफ्त में आए पिस्टल लूटकांड के आरोपी सूर्यभान यादव और शशिकांत यादव आजमगढ़ के रहने वाले हैं। सूर्यभान सेक्टर-12 में, जबकि शशिकांत गाजियाबाद के खोड़ा में रहता है। दोनों एमसीए पास हैं और पोंजी स्कीम के तहत लंबे समय से फ्रॉड कर रहे थे। नाेएडा के सेक्टर-20 थाने की पुलिस ने पुलिस कर्मियों व आरोपियों से मैकबुक व आठ मोबाइल जब्त कर ली है।
पिस्टल लूट ने खोली एमपी पुलिस की उगाही की पोल
शुक्रवार को सेक्टर-18 में निजी बैंक के सामने एसआई राशिद से पिस्टल लूट हुई थी। इस मामले में कोतवाली सेक्टर-20 में कार सवार अज्ञात पांच-छह युवकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। छानबीन में पता लगा कि जिस शिकायत की जांच में सब इंस्पेक्टर नोएडा आए थे, उस मामले में आरोपित सूर्यभान से वह लोग तीन दिन से संपर्क में थे। वह लोग सूर्यभान के खाते को पहले फ्रीज भी करा चुके थे। उस खाते में 58 लाख रुपये थे। उसी खाते को डी-फ्रीज कराने के लिए उस दिन बैंक गए थे। डी-फ्रीज कराकर खाते से रकम निकलवाकर सायबर टीम द्वारा कुछ रकम शिकायतकर्ता चंद्रकांत दुबे के खाते मे ट्रांसफर किए जाने व अन्य धनराशि सायबर टीम द्वारा अपने पास रखकर सूर्यभान को इस मामले में बचाने की प्लानिंग थी।
सूर्यभान ने उगला पुलिस वालों की रिश्वत का राज
जब पुलिस ने सूर्यभान को पकड़कर पूछताछ की, तो पता लगा है कि जबलपुर पुलिस की टीम ने उन्हें फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी थी। इसके बाद 16 से 18 दिसंबर के बीच साइबर सेल जबलपुर की टीम ने अलग-अलग तरीके से 4 लाख 70 हजार रुपए कैश ले चुकी है। सूर्यभान ने पुलिस को बताया कि बिट क्वाइन सहित अन्य माध्यम से करीब 24 लाख रुपए पोंजी स्कीम मामले में शिकायतकर्ता चंद्रकांत दुबे को ट्रांसफर किया गया है। वही रकम फिर से साइबर सेल की टीम के आरक्षक आसिफ अली के खाते में ट्रांसफर किया गया है।
सूर्यभान के दोस्त मनोज ने दोस्तों संग मिलकर लूटी थी पिस्टल
नोएडा पुलिस अपर पुलिस आयुक्त लव कुमार के मुताबिक, पिस्टल लूट की जांच में एक वीडियो सामने आया। इसमें पिस्टल लूटकर भाग रहे आरोपितों की कार का नंबर दिख गया था। दिल्ली नंबर की कार के आधार पर पुलिस को मनोज तिवारी नाम के व्यक्ति के बारे में पता लगा। सर्विलांस से पता चला कि मनोज, सूर्यभान के संपर्क में था। इसके बाद पूछताछ में पता लगा कि सूर्यभान के कहने पर ही मनोज ने साइबर सेल की टीम को सबक सिखाने की प्लानिंग की थी। इसी प्लानिंग के तहत मनोज अपने चार-पांच अन्य साथियों के साथ सेक्टर-18 पहुंचा था और सब इंस्पेक्टर से उलझ कर पिस्टल लूट की वारदात को अंजाम देकर फरार हुआ। मनोज के पकड़े जाने पर लूटी गई पिस्टल बरामद होने की उम्मीद है।

जबलपुर स्टेट साइबर सेल कार्यालय

ये है पोंजी स्कीम
पोंजी स्कीम संचालक पहले तो नई कंपनी खोलते है, जिसमें वह दो चार लोगों को कंपनी में सैलरी या फिर कमीशन बेस पर रखते है। इन एजेंटों का काम होता है कि लोगों को अपनी कंपनी की स्कीम के बारे में बताना। एजेंट फोन या ई-मेल भेजकर लुभावनी स्कीमें बताते हैं। उन्हें अपनी नवस्थापित कंपनी से जुड़ने को कहते है और बिना देरी किए जुड़ने के लिए अन्य लाभ का फायदा देने का झांसा देते हैं।
एडीजी स्टेट साइबर ने दिए प्राथमिक जांच के आदेश
एडीजी स्टेट साइबर सेल ए साई मनोहर ने मामले में प्राथमिक जांच के आदेश दिए हैं। भोपाल स्टेट साइबर सेल के एसपी गुरुकरन सिंह को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। 27 तक जांच रिपोर्ट मांगी है। आदेश में कहा गया है कि आरोपित पुलिस कर्मियों के अलावा अन्य अधिकारी या कर्मी की भूमिका मिलती है, तो उसे भी जांच में शामिल करेंगे। 54 हजार की ठगी से संबंधित पूरा दस्तावेज जांच अधिकारी और नोएडा पुलिस आयुक्त व थाना सेक्टर 20 को उपलब्ध कराने को कहा है।

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नोएडा अपर पुलिस आयुक्त ने किया खुलासा

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