ट्वीट किया- I Retire… पर खेल से नहीं, कोरोना की निगेटिविटी से

वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पियन और ओलिम्पियन पीवी सिंधु ने सोमवार को एक ट्वीट कर सबको चौंका दिया। दरअसल, उन्होंने ट्वीट में तीन पेज पोस्ट किए। पहले पेज में बड़े अक्षरों में लिखा था- I RETIRE। इसे देखकर लोगों ने कयास लगाना शुरू कर दिया कि वे खेल से रिटायर हो रही हैं, लेकिन उनके ट्वीट में दो और पेज थे। इसमें उन्होंने बताया कि वे किस बात से रिटायर होने का जिक्र कर रही हैं। उनकी पूरी बात पढ़ें उन्हीं के शब्दों में…

सिंधु ने 3 पेज ट्वीट किए। पहले पेज में लिखा- डेनमार्क ओपन बुरी घटनाओं की आखिरी कड़ी था, अब मैं इनसे रिटायर हो रही हूं।

इसके बाद उन्होंने दूसरे पेज में लिखा- काफी समय से मैं अपनी भावनाएं स्पष्ट करने के बारे में विचार कर रही थी। मैं मानती हूं कि पिछले कुछ समय से मैं इनके साथ संघर्ष कर रही थी। आपको पता है, मैं काफी गलत सोच रही थी। इसलिए मैं आज आपको बताने के लिए लिख रही हूं कि इन सबसे मैं उबर चुकी हूं। मुझे पता है कि इसे पढ़ते वक्त आप चौंकेंगे और भ्रमित होंगे, लेकिन जब आप इसे पूरा पढ़ लेंगे तो आपको मेरा नजरिया साफ हो जाएगा। उम्मीद करती हूं कि आप इसका समर्थन भी करेंगे।

यह महामारी मेरे लिए आंख खोलने वाली रही है। मैं किसी भी मुश्किल प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ मैच के आखिरी शॉट तक जी-जान लगाकर लड़ने के लिए तैयारी कर सकती हूं। मैंने पहले भी ये कर चुकी हूं और मैं फिर ये कर सकती हूं। पर ऐसे अदृश्य वायरस को कैसे रहा सकती हूं, जिसने पूरी दुनिया को एक ही झटके में अपनी चपेट में ले लिया? हम महीनों से घर में हैं और अब भी जब घर से बाहर निकलते हैं तो मन में सवाल रहता है।

इन सारी चीजों को भीतर उतारते हुए और ऑनलाइन बहुत सारी दिल दुखा देने वाली बातें पढ़ने के बाद मैं खुद पर और जिस दुनिया में मैं रह रही हूं, उस पर सवाल उठाने लगी। डेनमार्क ओपन में भारत का प्रतिनिधित्व ना कर पाना बुरी घटनाओं की ऐसी आखिरी कड़ी थी।

सिंधु ने तीसरे पेज पर लिखा- मैं आज अस्थिरता के इस मौजूदा दौर से रिटायर हो रही हूं। मैं नकारात्मकता, अनिश्चितता, लगातार बने हुए इस डर से रिटायर हो रही हूं। जिस अनजान चीज पर कोई नियंत्रण नहीं है, उससे मैं रिटायर हो रही हूं। मैं इस वायरस को लेकर हमारे खराब हाईजीन स्टैंडर्ड और लापरवाही भरे रवैये से रिटायर होने का चयन कर रही हूं।

हम लोगों को मुद्दे से भटकना नहीं चाहिए, हमें ज्यादा बेहतर तैयारी करनी चाहिए। हमें निश्चित तौर पर मिलकर इस वायरस को हराना होगा। आज हम जो भी चुनेंगे वो हमारा और हमारी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य तय करेगा। हम उन्हें नीचा दिखाने का जोखिम नहीं ले सकते।

शायद आप लोगों को मैंने एक छोटा सा हार्ट हटैक दे दिया। अभूतपूर्व समय में अभूतपूर्व उपायों की जरूरत होती है। मुझे लगता है कि आप लोगों को उठाना था और समस्या की तरफ आपका ध्यान ले जाना था। कहा जाता है कि हमें हमेशा ये उम्मीद करनी चाहिए कि सुरंग के आखिरी छोर पर रोशनी चमकेगी।

ये सच है कि डेनमार्क ओपन नहीं हुआ, लेकिन ये मुझे ट्रेनिंग करने से रोक नहीं पाया। जब जिंदगी ऐसा करती है तो हमें दोगुनी ताकत के साथ वापसी करनी चाहिए। इसलिए एशिया ओपन के लिए मैं तैयार हूं। मैं पूरी ताकत से लड़े बिना हार नहीं मानूंगी। मैं इस डर को हराए बिना हार नहीं मानूंगी। मैं तब तक ऐसा करती रहूंगी, जब तक हमारी दुनिया सुरक्षित नहीं हो जाती।

2019 में बनीं थी वर्ल्ड चैम्पियन

24 साल की पीवी सिंधु 2019 में बैडमिंटन में भारत की पहली वर्ल्ड चैंपियन बनी थीं। उन्होंने फाइनल में 2017 की चैंपियन जापान की नोजोमी ओकुहारा को हराया था। यह सिंधु का वर्ल्ड चैंपियनशिप में 5वां मेडल था। वे ऐसा करने वाली दुनिया की दूसरी महिला खिलाड़ी हैं। उन्होंने 1 गोल्ड, 2 सिल्वर, 2 ब्रॉन्ज जीते हैं।

डेनमार्क ओपन से नाम वापस ले लिया था

ओलिंपिक में सिल्वर मेडलिस्ट सिंधु ने डेनमार्क ओपन से नाम वापस ले लिया था। हालांकि, बाद में कोरोना के कारण यह टूर्नामेंट अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया था। पहले यह टूर्नामेंट 13 से 18 अक्टूबर तक ओडेंस में होने वाला था।

नेशनल कैम्प को छोड़कर लंदन जाने पर हुआ था विवाद

सिंधु हैदराबाद में चल रहे नेशनल कैम्प को छोड़कर लंदन चली गई थीं। इसके बाद अलग-अलग तरह के बयान सामने आए थे। उनके पिता का दावा था कि हैदराबाद में सिंधु सही ढंग से ट्रेनिंग नहीं कर पा रहीं थीं। नेशनल कोच पुलेला गोपीचंद को इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि सिंधु किसी पारिवारिक विवाद की वजह से लंदन गईं।

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