भारत बायोटेक के MD बोले- हमारी वैक्सीन पर कुछ लोग गॉसिप कर रहे, हम अनुभव वाली ग्लोबल कंपनी हैं

भारत बायोटेक की कोवैक्सिन को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने इमरजेंसी यूज की मंजूरी दे दी है। इस पर विपक्ष ने आरोप लगाया है कि ये मंजूरी हड़बड़ी में दी गई है। वैक्सीन पर जारी सियासत के बीच भारत बायोटेक के एमडी कृष्णा एल्ला ने अपना पक्ष रखा है। एल्ला ने कहा कि वैक्सीन पर सियासत हो रही है। कुछ लोग हमारी वैक्सीन के बारे में केवल गॉसिप कर रहे हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए।

एल्ला ने कहा, ‘मैं ये स्पष्ट करना चाहता हूं कि मेरे परिवार का कोई भी सदस्य किसी भी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ा है।’ उन्होंने यह भी कहा कि हमारे पास वैक्सीन बनाने का अनुभव है।

सियासत पर भारत बायोटेक के MD की दो-टूक

  • हम ग्लोबल कंपनी: कृष्णा एल्ला ने कहा, ‘हम केवल भारत में क्लीनिकल ट्रायल नहीं कर रहे हैं। हमने ब्रिटेन समेत 12 देशों में ट्रायल किए हैं। हम पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और दूसरे देशों में ट्रायल कर रहे हैं। हम केवल भारतीय कंपनी नहीं है, हम वास्तव में एक ग्लोबल कंपनी हैं।’
  • 123 देशों के लिए वैक्सीन बनाई: उन्होंने कहा, ‘हम ऐसी कंपनी नहीं हैं, जिसके पास वैक्सीन बनाने का अनुभव नहीं है। हमारे पास वैक्सीन बनाने का बहुत ज्यादा अनुभव है। हमने 123 देशों के लिए वैक्सीन बनाई। इस तरह का अनुभव रखने वाली हमारी कंपनी इकलौती है।’
  • डेटा पर सवाल उठाने वाले आर्टिकल्स पढ़ें: एल्ला ने कहा, ‘कई लोग कह रहे हैं कि हमारे डेटा में पारदर्शिता नहीं बरती गई है। मुझे लगता है कि लोगों को संयम रखना चाहिए और इंटरनेट पर हमने डेटा के संबंध में जो आर्टिकल पब्लिश किए हैं, उन्हें पढ़ना चाहिए। अब तक 70 से ज्यादा आर्टिकल इंटरनेशनल जर्नल्स में पब्लिश हो चुके हैं।’
  • हम पर लांछन लगाना ठीक नहीं: उन्होंने कहा, ‘वैक्सीन पर कई लोग केवल गॉसिप कर रहे हैं, ये भारतीय कंपनियों पर लांछन है। ये हमारे लिए सही नहीं है। हमारे साथ ऐसा नहीं होना चाहिए। मेरेक इबोला वैक्सीन का ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल कभी पूरा नहीं हुआ, इसके बावजूद WHO ने उसे लाइबेरिया और गीनिया के लिए इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी थी’
  • पता नहीं भारतीय कंपनियां ही क्यों निशाना बनती हैं: कृष्णा एल्ला ने कहा, “मुझे नहीं पता कि भारतीय कंपनियों को ही हमेशा दुनियाभर के लोग निशाना बनाता हैं। जबकि, इमरजेंसी मेडिकल लाइसेंस जारी करना तो ग्लोबल प्रैक्टिस है। अमेरिका भी कहता है कि अगर आपका इम्युनाइजेशन डेटा अच्छा है तो आपको इमरजेंसी मंजूरी दी जा सकती है।’

  • हमारे पास दो करोड़ डोज तैयार: उन्होंने कहा, “मौजूदा समय हमारे पास 2 करोड़ डोज तैयार है। हम जल्द ही 70 करोड़ डोज तैयार कर लेंगे। ये वैक्सीन हमारे चार सेंटर्स पर तैयार हो रहे हैं। इनमें से तीन हैदराबाद में है और एक बेंगलुरु में। इस समय हम कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इनमें लाजिस्टिक समस्या भी शामिल है।’
  • BSL-3 प्रोडक्शन सुविधा सिर्फ हमारे पास: उन्होंने कहा, ‘गर्व की बात है कि पूरी दुनिया में केवल हमारे पास BSL-3 प्रोडक्शन सुविधा है। यहां तक कि US के पास भी ये सुविधा नहीं है। हम पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी में मदद करने के लिए हैं, फिर वो दुनिया के किसी भी हिस्से में क्यों न हो।’ उन्होंने कोरोना के नए स्ट्रेन पर कहा कि हमें एक हफ्ते का समय दीजिए। इस मसले पर हम आपको पूरा डेटा कंफर्म कर देंगे।
  • शुरुआत में वैक्सीन थोड़ी महंगी होगी: वे बोले कि शुरूआती दौर में वैक्सीन थोड़ी महंगी होगी। जब वैक्सीन का प्रोडक्शन बढ़ जाएगा तब इसका प्राइज मार्केट के जरिए कंट्रोल होने लगेगा। हम ओपन लेवल पर लोगों को वैक्सीन लगाते रहेंगे और सुरक्षा और एफिशिएंसी की मॉनिटरिंग भी करते रहेंगे।

अखिलेश यादव ने सबसे पहले सवाल खड़े किए थे
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सबसे पहले इस पर सवाल खड़े किए थे। शनिवार को सोशल मीडिया पर कहा था कि ताली-थाली बजवाकर कोरोना को भगाने वाली सरकार पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की वैक्सीन लगवाने की उस व्यवस्था पर भरोसा नहीं कर सकते, जो कोरोनाकाल में ठप्प-सी पड़ी रही थी।

अखिलेश के समर्थन में कांग्रेस
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने अखिलेश का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से भाजपा और प्रधानमंत्री CBI, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और ED का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं के खिलाफ कर रहे हैं, मुझे लगता है कि अखिलेश यादव का यह डर गलत नहीं है कि वैक्सीन का भी गलत इस्तेमाल हो सकता है।

शशि थरूर और जयराम रमेश ने भी सवाल उठाए
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि कोवैक्सिन ने अभी तक अपना तीसरा ट्रायल भी पूरा नहीं किया है। जल्दबाजी में वैक्सीन को मंजूरी दी गई और यह खतरनाक हो सकता है। उन्होंने कहा कि जब तक ट्रायल पूरा नहीं हो जाता, इसके इस्तेमाल से बचा जाना चाहिए।

पार्टी के एक और वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि भारत बायोटेक एक फर्स्ट रेट इंटरप्राइज है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि कोवैक्सिन के फेज-3 ट्रायल से जुड़े प्रोटोकॉल, जिन्हें इंटरनेशनल लेवल पर मंजूर किया गया है, उसे मोडिफाई किया जा रहा है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री को इसका जवाब देना चाहिए।

विपक्ष को सरकार ने दिया था जवाब

  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि ऐसे गंभीर मुद्दों पर राजनीति करना काफी निराशाजनक है। शशि थरूर, अखिलेश यादव और जयराम रमेश वैक्सीन को अप्रूव करने के लिए अपनाए गए प्रोटोकॉल पर सवाल उठाने की कोशिश न करें।
  • विपक्ष के सवालों पर निशाना साधते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दल किसी भी भारतीय चीज पर गर्व नहीं करते। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्हें इस बात पर आत्ममंथन करना चाहिए कि वैक्सीन पर उनके झूठ का इस्तेमाल भ्रम फैलाने वाले अपना एजेंडा चलाने के लिए करेंगे। देश की जनता ऐसी राजनीति को खारिज कर देगी।
  • केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कांग्रेस पर निशान साधते हुए कहा कि पहले वे भारत द्वारा बालाकोट एयर स्ट्राइक का सबूत मांगते थे। फिर पुलवामा हमले पर शक जताते हैं और अब वैक्सीन पर भी सवाल उठा रहे हैं। यह दिवालियापन नहीं तो क्या है?

कोवैक्सिन और कोवीशील्ड को मिला अप्रूवल
भारत बायोटेक की स्वदेशी कोवैक्सिन और सीरम इंस्टीट्यूट की कोवीशील्ड के इमरजेंसी यूज के लिए ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने रविवार को मंजूरी दे दी। वहीं, जायडस कैडिला हेल्थकेयर की जायकोव-डी को फेज-3 ट्रायल का अप्रूवल मिला है।

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भारत बायोटेक के एमडी कृष्णा एल्ला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया।

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