मुश्किल में साथ रहे कांग्रेस और बसपा से आए विधायक मंत्री बन सकते हैं, पायलट को ज्यादा कुछ नहीं

तीसरी बार सत्ता में आने के बाद से ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने हर दिन चुनौतियां खड़ी रहती हैं। सचिन पायलट विवाद खत्म होने के बाद भी गहलोत को अगले कुछ दिनों में इस गुट से फिर दो-दो हाथ करने पड़ सकते हैं। दरअसल, मंत्रिमंडल में फेरबदल की आग को हवा देकर अजय माकन तो दिल्ली लौट गए, लेकिन गहलोत को इसे बुझाने के लिए कई जतन करने पड़ेंगे।

गहलोत किसी भी हालत में पायलट गुट को अपनी सरकार पर भारी नहीं पड़ने देंगे। राज्य में विधानसभा की 200 सीटें हैं। इस लिहाज से 30 मंत्री बन सकते हैं। पांच मंत्री पद पहले से खाली थे। दो को पायलट विवाद में हटा दिया गया। एक मंत्री के निधन के बाद फिलहाल कुल 8 पद खाली हैं। पायलट की बगावत के समय कांग्रेस के साथ बने रहे और बसपा से आए विधायकों का भी सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर दबाव है।

बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए विधायकों ने तो हाल में अपना गुस्सा भी जाहिर कर दिया था। ऐसे में गहलोत नए मंत्रिमंडल में उन्हें जगह दे सकते हैं। वहीं, सीपी जोशी खुद या उनसे जुड़े कुछ नेताओं को भी सत्ता में आने का फायदा मिल सकता है। प्रमोद जैन भाया, उदयलाल अंजाना और भंवरसिंह भाटी के कामकाज का भी आकलन किया जा रहा है। उनके विभागों में बदलाव हो सकता है।

पायलट गुट के रमेश मीणा और विश्वेंद्र को मंत्री बनाने का दबाव

बगावत के बाद कांग्रेस में लौटे पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट फिलहाल अपने लिए कुछ नहीं मांग रहे हैं। वे अपने उन मंत्रियों और विधायकों को फिर सेट करना चाहते हैं, जिनके जमे जमाए पैर उनकी बगावत में उखड़ गए थे। ये बात अलग है कि गहलोत उन्हीं मजबूत पायों को फिर से पांव टिकाने की इजाजत नहीं देंगे।

सचिन पायलट रमेश मीणा और विश्वेंद्र सिंह को फिर से मंत्रिमंडल में शामिल कराना चाहते हैं। इसके लिए अशोक गहलोत गुट किसी भी हालत में तैयार नहीं होगा। ऐसी स्थिति में सामाजिक संतुलन के लिए मीणा की जगह मीणा और राजपूत की जगह राजपूत को मंत्री बनाया जा सकता है। वह भी पायलट को राजी करके।

माना जा रहा है कि स्वभाव से सरल होने का फायदा अब दीपेंद्र सिंह शेखावत को मिल सकता है। ब्रिजेंद्र ओला को भी मंत्री पद मिलने की संभावना है। यह दोनों सचिन पायलट और गहलोत के बीच समझौते का माध्यम बन सकते हैं। इसी तरह एक मीणा विधायक भी मंत्रिमंडल में सचिन पायलट की मंजूरी से आएगा, लेकिन वह गहलोत विरोधी नहीं होगा।

राजनीतिक नियुक्तियों में पायलट की चलेगी

माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल के बजाय सचिन पायलट को कुछ राजनीतिक नियुक्तियों में फ्री हैंड मिल सकता है। उन पदों पर पायलट के कहे अनुसार नियुक्ति हो सकती है। यह नियुक्तियां कुछ जिलों तक ही सीमित होंगी। वहां पायलट खेमा मुख्य भूमिका में हो सकता है। यह क्षेत्र टोंक सहित पायलट के असर वाले गुर्जर बाहुल्य होंगे।

फिर से डिप्टी सीएम की मांग, पर गहलोत नहीं बनने देंगे फिर नया पावर स्टेशन

प्रदेश में फिर से डिप्टी सीएम बनाने की मांग उठ रही है। सीपी जोशी जैसे वरिष्ठ नेताओं को डिप्टी सीएम बनाने की चर्चा होती रही है, लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत फिर नया पावर स्टेशन बनाने की कोशिश को कामयाब नहीं होने देना चाहते। सचिन पायलट भी अपने गुट से किसी को डिप्टी सीएम बनाने की बात रख चुके हैं, लेकिन नए बदलाव में यह पद किसी को मिलने की संभावना नहीं है।

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The cabinet can change, but the command will remain with Gehlot, the pilot will have only some share

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