राजनाथ बोले- अब जरूरत पड़ने पर जवान सीमा पार जाकर आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को फेसबुक लाइव सेशन के दौरान भारत की बातः सीमाएं और हमारे पड़ोसी विषय पर संबोधित किया। उन्होंने 23 मिनट के भाषण में पड़ोसी मुल्कों के साथ भारत और भारतीय सेना के रवैये को लेकर बात की। अपनी बात शुरू करने से पहले उन्होंने दैनिक भास्कर को इस आयोजन के लिए बधाई भी दी।

सिंह ने कहा- आज का विषय बेहद संवेदनशील है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। बहुत कुछ खुलकर कहना तो मेरे लिए संभव नहीं है। फिर भी मैं इतना जरूर कहूंगा कि जब हम भारत की सीमाओं की बात करते हैं तो हम 7 देशों के साथ जु़ड़ी सीमाओं की बात करते हैं। पिछले 73 साल में कई बार चुनौतियां आई हैं। मगर हमारी सेना ने सफलता पूर्वक इसका सामना किया है।

उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में सेना, पुलिस, सीआरपीएफ, इंटेलीजेंस एजेंसियों के बीच इतना बेहतर कोआर्डिनेशन है कि हमें आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने में काफी हद तक कामयाबी मिल रही है। कश्मीर में भी आतंकवाद लगभग समाप्त होकर रहेगा। समय लगेगा कुछ और। पहले से आतंकवाद में भारी कमी आई है। पाकिस्तान ने आतंकवाद को लेकर सारे हथकंडे आजमा लिए हैं।

सिंह ने कहा- आतंकवाद के खिलाफ पिछले 6 साल में बदलाव आया है

सिंह बोले कि जरूरत पड़ने पर हमारे जवान सीमा पार जाकर भी आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं। दो उदाहरण आपके सामने है। 1999 में कारगिल, 2001 में मुंबई हमला, उरी में 2017 का हमला, 2019 में पुलवामा हमला। ये सबकुछ सीमा पार से प्रायोजित था। इसके लिए हमारे पास पुख्ता सबूत है।

आतंकवाद के खिलाफ पिछले 6 साल में बदलाव आया है। वह है उसके खिलाफ भारत का रिस्पांस का। पहले आतंकी हमला होता था, जवान कार्रवाई करते थे। सबूत इशारा करते थे कि आतंकियों के तार पाकिस्तान से जुड़े हैं। मगर पाकिस्तान में बैठे आतंकियों को कोई खौफ नहीं होता था। वो जानते थे कि हम बचे रहेंगे।

भारत केवल अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसे उठाएगा और डोजियर देगा। आज भी करते हैं लेकिन थोड़ा अंतर है। जरूरत पड़ने पर हमारे जवान सीमा पार जाकर भी आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं। दो उदाहरण आपके सामने है।

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सिंह ने कहा- आतंकवाद के खिलाफ पिछले 6 साल में बदलाव आया है। वह है उसके खिलाफ भारत का रिस्पांस का। पहले आतंकी हमला होता था, जवान कार्रवाई करते थे।

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