सिंगल-डोज वैक्सीन ने बनाई एंटीबॉडी; चंद सेकंड में पता चलेगा कोरोना वैक्सीन का रिस्पॉन्स

अमेरिका में दो अलग-अलग स्टडी में कोरोनावायरस के खिलाफ नई जानकारी सामने आई है। रिसर्चर्स ने एक नैनोपार्टिकल वैक्सीन बनाई है जो सिंगल डोज के बाद ही वायरस को खत्म करने वाला एंटीबॉडी रिस्पॉन्स डेवलप करती है। वहीं, रिसर्चर्स की एक अन्य टीम ने वह तरीका खोज निकाला है, जिससे चंद सेकंड्स में पता चल जाएगा कि वैक्सीन का शरीर पर रिस्पॉन्स क्या रहा है।

अमेरिका में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के पीटर किम के नेतृत्व वाली टीम ने कहा है कि कोरोना वैक्सीन का पहला टारगेट स्पाइक प्रोटीन है, जिसके जरिए कोरोनावायरस शरीर में प्रवेश करता है। अमेरिका में इस समय दो वैक्सीन को अप्रूवल मिला है और यह दोनों ही mRNA वैक्सीन है जो इंसानों की कोशिकाओं में अस्थायी तौर पर स्पाइक प्रोटीन बनाती हैं। इससे इम्यून रिस्पॉन्स विकसित होता है और एंटीबॉडी प्रोडक्शन शुरू होता है।

चूहों पर सफल रही नैनोपार्टिकल वैक्सीन
एसीएस सेंट्रल साइंस जर्नल में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक, टीम ने चूहों पर अपनी वैक्सीन आजमाई। सिंगल डोज के बाद ही उनमें कोरोनावायरस से रिकवर हो चुके कॉन्वालेसेंट प्लाज्मा से दोगुना ज्यादा एंटीबॉडी बनी है। यह स्पाइक प्रोटीन से इम्युनाइज किए गए चूहों की तुलना में बहुत ज्यादा थी। 21 दिन बाद दूसरा डोज देने पर एंटीबॉडी की संख्या और बढ़ गई। इन नतीजों को अभी इंसानों पर होने वाले क्लीनिकल ट्रायल्स में साबित होना है। इसके बाद भी रिसर्चर्स का मानना है कि स्पाइक/फेरिटीन नैनोपार्टिकल्स कोरोना के खिलाफ सिंगल डोज वैक्सीनेशन के लिए व्यवहारिक स्ट्रैटजी हो सकती है।

नैनोपार्टिकल 3डी प्रिंटिंग से बना नया डिवाइस

कोरोना टेस्ट चिप जिसे एरोसॉल जेट नैनोपार्टिकल 3डी प्रिंटिंग से बनाया गया है।

अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने नया नैनोमटेरियल-बेस्ड बायोसेंसिंग प्लेटफॉर्म विकसित किया है। यह चंद सेकंड्स में बता देगा कि कोरोनावायरस से बचाव के लिए शरीर में एंटीबॉडी बनी है या नहीं। इससे नई वैक्सीन के इम्युनोलॉजिकल रिस्पॉन्स का सटीक अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी। अमेरिका की कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर भारतवंशी राहुल पनात भी इस रिसर्च का हिस्सा थे। उन्होंने कहा कि हमने नैनोपार्टिकल 3डी प्रिटिंग जैसी नई तकनीक का इस्तेमाल कर डिवाइस बनाई है जो कोरोना एंटीबॉडी की तत्काल पहचान करती है। यह टेस्टिंग प्लेटफॉर्म सिर्फ खून की छोटी बूंद (5 माइक्रोलीटर) में वायरस की दो एंटीबॉडी- स्पाइक S1 प्रोटीन और रिसेप्टर-बाइंडिंग डोमेन (RBD) की मौजूदगी का पता लगाता है। इसका इस्तेमाल भी आसान है और नतीजे स्मार्टफोन पर भी मिल जाते हैं।

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Coronavirus Vaccine Tracker India US Status Update; Single Dose Vaccine Developed By Stanford Researchers

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