देश की GDP में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी 30% तक बढ़ाने पर फोकस, आत्मनिर्भर बनने में मिलेगी मदद

आत्मनिर्भर भारत की ओर सरकार मजबूती से आगे बढ़ रही है। फिक्की (FICCI) के 93वें एनुअल कन्वेंशन में केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के तहत सरकार का फोकस सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी 24-26% से बढ़ाकर 30% करने पर है। इसके अलावा अगले दो सालों में भारतीय रूरल इंडस्ट्री को 80 हजार करोड़ रुपए से बढ़ाकर दो लाख करोड़ रुपए करने की है।

‘आत्मनिर्भर भारत में MSME की भूमिका’

फिक्की के वर्चुअल कन्वेंशन में ‘आत्मनिर्भर भारत में MSME की भूमिका’ विषय पर केंद्रीय MSME मंत्री ने कहा कि यह देश की अर्थव्यवस्था में रीड की हड्डी है। इसके अलावा सरकार द्वारा जारी गरीबी उन्मूलन मिशन के लिए भी यह सहायक है। उन्होंने कहा कि देश की GDP में MSME की भागीदारी 30% की है। कुल एक्सपोर्ट में भी इसकी हिस्सेदारी 48% की है। अबतक इस सेक्टर में 11 करोड़ नौकरियां आ चुकी हैं।

रूरल इंडस्ट्रियल ग्रोथ

नितिन गड़करी ने कहा कि सरकार का फोकस रूरल इंडस्ट्री में रोजगार और उसके ग्रोथ को बढ़ाने पर है। इससे देश में गरीबी समाप्त करने में मदद मिलेगी। इसके तहत सरकार की पहली प्राथमिकता गांव, गरीब, मजदूर और किसान हैं। इस मौके पर गड़करी ने फिक्की MSME टूल किट को लॉन्च किया। यह एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जिससे आंत्रप्योनोर को सही कारोबार की पहचान करने और योजना बनाने में मदद मिलेगी।

इस अवसर पर फिक्की प्रेसिडेंट डॉ. संगीता रेड्डी ने कहा कि कोरोना के कारण ग्लोबल चेन वैल्यू के साथ भारतीय MSME के लिए भी अवसर सामने आए हैं। अब बड़ी संख्या में कंपनियां नई टेक्नोलॉजी जैसे ऑटोमेशन, AI,IoT और 3D को अपना रही हैं। इससे ग्लोबल लेवल पर देसी कंपनियां कंपीट करने को तैयार हैं।

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फिक्की के वर्चुअल कन्वेंशन में ‘आत्मनिर्भर भारत में MSME की भूमिका’ विषय पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह देश की अर्थव्यवस्था में रीड की हड्डी है। -फाइल फोटो

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