बजट टार्गेट के मुकाबले इस कारोबार साल में 2.5-3 लाख करोड़ रुपए कम रह सकती है ग्रॉस टैक्स वसूली

टैक्स वसूली के अब तक के रुझान के मुताबिक इस कारोबारी साल में ग्रॉस टैक्स वसूली बजट टार्गेट के मुकाबले 2.5-3 लाख करोड़ रुपए कम रह सकती है। यह बात वरिष्ठ आधिकारिक सूत्रों ने कही। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में इस कारोबारी साल के लिए 24.23 लाख करोड़ रुपए की टैक्स वसूली का अनुमान रखा था।

मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कारोबारी साल (2019-20) के लिए ग्रॉस टैक्स वसूली का संशोधित अनुमान 21.63 लाख करोड़ रुपए था, जो उस साल के बजट अनुमान के मुकाबले 2.98 लाख करोड़ रुपए कम था। रिफंड्स और राज्यों के डिवॉल्यूशन को एडजस्ट करने के बाद 2019-20 में टैक्स कलेक्शन का नेट शॉर्टफॉल 1.45 लाख करोड़ रुपए था।

कोरोना महामारी के कारण टैक्स वसूली घटने का है अनुमान

रिपोर्ट में एक सरकारी अधिकारी के हवाले से कहा गया कि लॉकडाउन हटाए जाने और कारोबारी गतिविधियों के फिर से शुरू हो जाने के बाद भी टैक्स वसूली में बहुत ज्यादा कमी रह जाने की आशंका है, क्योंकि यह साल महामारी से प्रभावित रही है। पिछले कुछ महीने में हालात सुधरे हैं। इसलिए उम्मीद है कि शॉर्टफॉल उतना ज्यादा नहीं रहेगा, जितना पहले अनुमान लगाया गया था। अधिकारी ने हालांकि कहा है कि अगले सप्ताह एडवांस टैक्स कलेक्शन की दिसंबर की खेप आने के बाद इस कारोबारी में टैक्स वसूली में कमी का और सटीक अंदाजा लग पाएगा।

अक्टूबर तक बजट अनुमान के मुकाबले 34.2% कलेक्शन

कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-अक्टूबर 2020-21 की अवधि में नेट टैक्स रेवेन्यू कलेक्शन 6.91 लाख करोड़ रुपए का हुआ। यह बजट में तय किए गए अनुमान का 34.2 फीसदी है। पिछले साल की समान अवधि में बजट अनुमान के मुकाबले 46.2 फीसदी की टैक्स वसूली हो गई थी। हालांकि अक्टूबर का 1.41 लाख करोड़ रुपए का नेट टैक्स कलेक्शन इस कारोबारी साल में पहली बार पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले ज्यादा है।

अक्टूबर और नवंबर में GST वसूली 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा

इस कारोबारी साल में पहली बार GST वसूली 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा रही। अक्टूबर में कुल GST वसूली सालाना आधार पर 10.2 फीसदी ज्यादा 1.05 लाख करोड़ रुपए रही। नवंबर में 1.04 लाख करोड़ रुपए की GST वसूली हुई।

जुलाई में ही वित्तीय घाटा सालाना बजट अनुमान को पार कर चुका है

रेवेन्यू वसूली कम रहने के कारण इस कारोबारी साल की पहली छमाही में सरकार का वित्तीय घाटा बढ़कर 9.14 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया, जो सालाना बजट अनुमान का 114.8 फीसदी है। लॉकडाउन के कारण रेवेन्यू वसूली में कमी आई है। इस कारोबारी साल में जुलाई में ही वित्तीय घाटा सालाना बजट अनुमान को पार कर गया था। बजट में इस कारोबारी साल के लिए वित्तीय घाटा का अनुमान 7.96 लाख करोड़ रुपए या बजट का 3.5 फीसदी तय किया गया है।

वित्तीय घाटा बजट अनुमान के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा रह सकता है

माना जा रहा है कि वित्तीय घाटा अनुमान के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा होगा, क्योंकि सरकार ने खर्च बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है और GDP में भारी गिरावट की आशंका है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने कहा है कि इस कारोबारी साल में GDP में 7.5 फीसदी की गिरावट आ सकती है। कारोबारी साल 2019-20 में वित्तीय घाटा GDP के मुकाबले 4.6 फीसदी पर पहुंच गया था, जो 7 साल का ऊपरी स्तर है।

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में इस कारोबारी साल के लिए 24.23 लाख करोड़ रुपए की टैक्स वसूली का अनुमान रखा था

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