विदेशी बाजारों में सुधार जारी रहने पर 1.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है निर्यात

विदेशी बाजारों की हालत में सुधार की रफ्तार बनी रही तो मार्च 2021 में खत्म होने वाले फाइनेंशियल ईयर के दौरान जेम्स एंड ज्वैलरी का एक्सपोर्ट लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच सकता है। जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (GJEPC) के चेयरमैन कोलिन शाह ने सोमवार को कहा कि एक्सपोर्ट में हर महीने 20-25 लाख डॉलर की बढ़ोतरी होती रही, तो मौजूदा वित्त वर्ष के अंत तक कुल निर्यात 20-21 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

सितंबर में पिछले साल से 26 पर्सेंट कम रहा था निर्यात

शाह ने कहा कि जेम्स एंड ज्वैलरी के निर्यात में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। सितंबर में कुल निर्यात पिछले साल के उसी महीने से 26.45 पर्सेंट कम रहा था। अक्तूबर में निर्यात सालाना आधार पर 19 पर्सेंट कम रहा जबकि दिसंबर में एक्सपोर्ट में सालाना कमी 3.88 पर्सेंट रही। शाह ने कहा, “पिछले 3-4 महीनों से निर्यात बढ़ाने की पुरजोर कोशिश हो रही है। खासतौर पर डिजिटल मोर्चे पर कई तरह की पहल की जा रही है। हर 15 दिन पर खरीदने और बेचने वालों की वर्चुअल मीटिंग और इंडिया ग्लोबल मीट कराई जा रही है। इससे न सिर्फ समूची ट्रेड इंडस्ट्री को कनेक्ट करने में मदद मिल रही है बल्कि कारोबार को भी बढ़ावा मिल रहा है।”

निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने किए उपाय

शाह ने कहा कि सरकार ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई तरह के उपाय किए हैं। गोल्ड लोन पर मिल रहे एक्सपोर्ट क्रेडिट और इंटरेस्ट सबवेंशन की टाइम लिमिट बढ़ा दी है। ब्याज और मासिक किस्त के भुगतान पर लागू मोरैटोरियम बढ़ा दी है। शाह ने कहा कि इन सबसे इंडस्ट्री को अपने पैरों पर वापस खड़ा होने में मदद मिली है। शाह ने कहा कि जेम्स एंड ज्वैलरी का मैन्युफैक्चरिंग भी नॉर्मल लेवल पर आ गया है। उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया लेवल पर यह पहले ही 85-90 पर्सेंट तक पहुंच गया है। 10 पर्सेंट की कमी कोविड-19 और कुछ इलाकों में अब भी लॉकडाउन लागू होने के चलते रह गई है।

तराशे हीरों पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाकर 2.5 पर्सेंट करने की मांग

जेम्स एंड ज्वैलरी के एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए GJEPC ने बजट पूर्व प्रस्तावों में तराशे और चमकाए गए हीरों पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को 7.5 पर्सेंट से घटाकर 2.5 पर्सेंट किए जाने का अनुरोध सरकार से किया है। काउंसिल ने तराशे और चमकाए गए प्रेसियस और सेमी प्रेसियस स्टोन की इंपोर्ट ड्यूटी 7.5 पर्सेंट से घटाकर 2.5 पर्सेंट करने जबकि सोना, चाँदी और प्लैटिनम जैसे धातुओं पर आयात शुल्क 12.5 पर्सेंट से घटाकर 4 पर्सेंट करने की मांग की है।

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Exports could reach Rs 1.6 lakh crore if foreign markets continue to improve

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