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12 साल से 17000 लोग खरीद रहे पानी:मुरैना में सरकारी नल-जल लाइन नहीं...निजी बोर से सप्लाई; आधे घंटे के ₹200, 1 घंटे के ₹400

AdminSeptember 5, 2026
12 साल से 17000 लोग खरीद रहे पानी:मुरैना में सरकारी नल-जल लाइन नहीं...निजी बोर से सप्लाई; आधे घंटे के ₹200, 1 घंटे के ₹400
मुरैना के रामपुर कलां में पानी की जरूरत ने निजी स्तर पर एक सप्लाई व्यवस्था खड़ी कर दी। करीब 17 हजार आबादी वाले गांव में एक निजी बोर से 12 साल से घरों तक पानी पहुंच रहा है। दीवारों, बालकनियों और बिजली के खंभों पर बिछी काली पाइपलाइनें इस व्यवस्था का नेटवर्क बता रही हैं। पानी की जरूरत वाले घर इस बोर से कनेक्शन लेकर हर महीने तय राशि चुका रहे हैं। आधे घंटे की सप्लाई के लिए 200 और एक घंटे के लिए 400 रुपए मासिक लिए जाते हैं। बोर मूल रूप से खेती के लिए कराया गया था, लेकिन खेती बंद होने के बाद इसमें पर्याप्त पानी मिलने पर आसपास के घरों को सप्लाई शुरू की गई। समय के साथ कनेक्शन बढ़ते गए और निजी बोर गांव के बड़े हिस्से के लिए पानी का नियमित स्रोत बन गया। खास बात यह है कि जहां सरकारी स्तर पर पानी की स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी, वहीं निजी स्तर पर 12 साल से सप्लाई चल रही है। प्रशासन अब नए बोर और बंद पड़े स्रोतों की जांच के जरिए समस्या का स्थायी समाधान करने की बात कह रहा है। तीन तस्वीरें देखिए… खंभों से घरों तक पहुंची पाइपलाइन गांव की गलियों में पानी की इस व्यवस्था के निशान साफ दिखाई देते हैं। काली पाइपें कहीं बिजली के खंभों के सहारे हैं तो कहीं मकानों की दीवारों और बालकनियों से होकर घरों तक पहुंच रही हैं। कई जगह पुरानी पाइपों में लीकेज और टूट-फूट भी है। इसके बावजूद लोगों के लिए यही व्यवस्था सबसे भरोसेमंद पानी का साधन बनी हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक गांव में हैंडपंप तो हैं, लेकिन कई जगह पर्याप्त पानी नहीं मिलता। कुछ जगहों पर पुराने स्रोत बंद हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बड़े बोर कराकर स्थायी व्यवस्था की जा सकती है, लेकिन वर्षों से समस्या जस की तस है। ग्रामीण बोले- नेता चुनाव में पानी का वादा करते हैं खेती के लिए था बोर, अब पानी बेचना ही कारोबार निजी बोर संचालक मोनू धाकड़ के मुताबिक उनके पिता ने खेत में खेती के लिए बोर कराया था। उसमें अच्छा पानी निकला। बाद में खेती बंद हो गई और आसपास के लोगों को पानी की जरूरत थी, इसलिए बोर से सप्लाई शुरू कर दी। अब यही उनका काम है। उनके अनुसार आधे घंटे की सप्लाई के 200 रुपए और एक घंटे के 400 रुपए प्रतिमाह लिए जाते हैं। पहले उनके पिता यह व्यवस्था संभालते थे, अब वे खुद देखते हैं। प्रशासन बोला-टीम भेजकर देखेंगे गांव के हालात जिला पंचायत सीईओ कमलेश भार्गव का कहना है कि रामपुर क्षेत्र में पानी की समस्या की जानकारी है। प्रशासन समय-समय पर योजनाओं के तहत बोर भी कराता रहा है। अब स्थिति की वास्तविकता देखने के लिए टीम भेजी जाएगी। जरूरत के अनुसार नए बोर कराए जाएंगे और बंद पड़े बोर की भी जांच कराई जाएगी। उनका कहना है कि जल्द समस्या दूर करने का प्रयास किया जाएगा।

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