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वर्ल्ड अपडेट्स:नेपाल ने 1 रुपये के सिक्के से विवादित नक्शा हटाया, प्राचीन बौद्ध मठ की तस्वीर लगी
Admin/July 20, 2026/10 min read/4 views
नेपाल सरकार ने एक रुपये के नए सिक्के को मंजूरी दे दी है। इस नए सिक्के से उस विवादित नक्शे को हटा दिया गया है, जिसमें लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था। इसकी जगह अब लो ग्याकर मठ की तस्वीर होगी। भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को लेकर लंबे समय से सीमा विवाद है। नेपाल इन इलाकों पर अपना दावा करता है, जबकि भारत इन्हें अपना क्षेत्र मानता है। नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली की सरकार ने मई 2020 में नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था। इस नक्शे में कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था। बाद में इसी नक्शे को एक रुपये के सिक्के पर भी जगह दी गई थी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मंत्रिपरिषद ने गुरुवार को नेपाल राष्ट्र बैंक को एक और दो रुपये के नए सिक्के ढालने की मंजूरी दी। फैसले के तहत एक रुपये के सिक्के से नया राजनीतिक नक्शा हटा दिया जाएगा। अब एक रुपये के सिक्के पर मुस्तांग जिले के मरांग गांव स्थित लो ग्याकर मठ की तस्वीर होगी। यह नेपाल के सबसे पुराने बौद्ध मठों में से एक माना जाता है। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता भीम रावल ने सरकार के इस फैसले की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने वास्तव में एक रुपये के सिक्के से लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी वाला नक्शा हटाने का फैसला किया है, तो यह नेपाल की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ गंभीर कदम होगा। नए एक रुपये के सिक्के का वजन 4 ग्राम से घटाकर 3.2 ग्राम और दो रुपये के सिक्के का वजन 5 ग्राम से घटाकर 3.8 ग्राम किया जाएगा। इसके अलावा, अब ये सिक्के मिश्रित धातु की बजाय स्टील से बनाए जाएंगे और इनका रंग पीले की जगह सफेद (स्टील रंग) होगा। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… नेपाल के प्रधानमंत्री पहली बार भारत और चीन के राजदूतों से मिलेंगे, अब तक बनाई थी दूरी नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह इस सप्ताह भारत और चीन के राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात करेंगे। काठमांडू पोस्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय के सहयोगियों और राजनयिक सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है। हालांकि मुलाकात की तारीख अभी तय नहीं की गई है, लेकिन विदेश मंत्रालय इसकी तैयारी कर रहा है। यह फैसला सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद लिया गया है। प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन शाह ने एक नई परंपरा शुरू की थी। उन्होंने काठमांडू में तैनात किसी भी विदेशी राजदूत से अकेले मुलाकात नहीं की। इसके बजाय उन्होंने 9 अप्रैल और 26 मई को सभी राजदूतों के साथ संयुक्त बैठकें की थीं। हाल के दिनों में प्रधानमंत्री शाह ने अपने कामकाज के तरीके में बदलाव किया है। पहले वह घरेलू व्यापारियों से भी व्यक्तिगत मुलाकात से बचते थे, लेकिन अब वह व्यापारियों, ठेकेदारों, उद्योगपतियों और निर्यातकों समेत विभिन्न वर्गों के लोगों से नियमित रूप से मिल रहे हैं। प्रधानमंत्री के एक सहयोगी ने बताया कि पिछले दो सप्ताह से प्रधानमंत्री अलग-अलग लोगों से मुलाकात कर रहे हैं। ऐसे में अब यह तय किया गया है कि उन्हें विदेशी राजदूतों और राजनयिकों से भी बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नेपाल की विदेश नीति में भारत और चीन सबसे महत्वपूर्ण पड़ोसी हैं, इसलिए शुरुआत इन्हीं दोनों देशों के राजदूतों से की जा रही है। नेपाल यह संदेश भी देना चाहता है कि भारत और चीन दोनों उसके लिए समान रूप से अहम हैं। इसी वजह से प्रधानमंत्री शाह एक ही दिन भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव और चीन के राजदूत झांग माओमिंग से अलग-अलग मुलाकात करेंगे। 27 मार्च को प्रधानमंत्री बनने के बाद शाह ने अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों से मिलने से भी इनकार कर दिया था। उन्होंने काठमांडू स्थित अमेरिकी दूतावास की उस मांग को स्वीकार नहीं किया, जिसमें दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री समीर पॉल कपूर और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दक्षिण और मध्य एशिया के विशेष दूत सर्जियो गोर से मुलाकात का अनुरोध किया गया था। इसके अलावा, सार्वजनिक कूटनीति मामलों की अमेरिकी अवर विदेश मंत्री सारा बी. रोजर्स भी नेपाल दौरे के दौरान प्रधानमंत्री शाह से मुलाकात नहीं कर सकी थीं। नेपाल में पहले यह परंपरा रही है कि नया प्रधानमंत्री पद संभालने के कुछ ही दिनों के भीतर प्रधानमंत्री कार्यालय या सरकारी आवास पर विदेशी राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात करता था। लेकिन बालेन शाह ने इस परंपरा को बदल दिया था। याह्या सिनवार के उत्तराधिकारी बने खलील अल-हय्या, हमास के राजनीतिक ब्यूरो चीफ चुने गए हमास ने सोमवार को खलील अल-हय्या को राजनीतिक ब्यूरो का नया प्रमुख चुने जाने की घोषणा की। वह याह्या सिनवार की जगह लेंगे, जिनकी अक्टूबर 2024 में गाजा में इजराइली सेना के अभियान में मौत हो गई थी। हमास के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एएफपी को बताया कि खलील अल-हय्या ने आंतरिक चुनाव में हमास के वरिष्ठ नेता खालिद मशाल को भारी मतों से हराया। सुरक्षा कारणों और संगठन के कई राजनीतिक तथा सैन्य नेताओं की मौत के चलते नेतृत्व का चुनाव बेहद गोपनीय तरीके से कराया गया। याह्या सिनवार की मौत के बाद हमास का नेतृत्व पांच सदस्यीय परिषद संभाल रही थी। इस परिषद का नेतृत्व वरिष्ठ नेता मोहम्मद दरवेश कर रहे थे। हमास ने बताया कि अब इस परिषद को भंग कर दिया जाएगा और इसके सभी सदस्य संगठन की शूरा परिषद को अपना इस्तीफा सौंपेंगे। 1960 में जन्मे खलील अल-हय्या ऐसे समय संगठन की कमान संभाल रहे हैं, जब गाजा में युद्धविराम को लेकर इजराइल और हमास के बीच मध्यस्थ देशों के जरिए बातचीत जारी है। अल-हय्या इन अप्रत्यक्ष वार्ताओं में हमास की ओर से प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। पिछले साल दोहा में इजराइल ने खलील अल-हय्या को निशाना बनाकर हमला किया था, लेकिन वह बच गए। हालांकि इस हमले में उनके एक बेटे की मौत हो गई थी। रूस का यूक्रेन पर बड़ा मिसाइल हमला: 40 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें, 100 से अधिक ड्रोन दागे रूस ने शनिवार रात यूक्रेन पर युद्ध शुरू होने के बाद के सबसे बड़े बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में से एक किया। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, इस संयुक्त हमले में 40 से अधिक विभिन्न प्रकार की मिसाइलें और 120 अटैक ड्रोन दागे गए। राजधानी कीव इस हमले का मुख्य निशाना रही। राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि रूस ने 40 से अधिक मिसाइलें और 120 अटैक ड्रोन लॉन्च किए। यूक्रेन की वायु सेना के अनुसार, उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने 18 मिसाइलों और 108 ड्रोन सहित कुल 126 हवाई लक्ष्यों को मार गिराया या निष्क्रिय किया। यूक्रेन की आपातकालीन सेवा ने बताया कि हमले में कीव में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 16 अन्य घायल हुए हैं। इससे पहले रूस ने दावा किया कि यूक्रेन ने रविवार रात मॉस्को और आसपास के क्षेत्रों पर 400 से अधिक ड्रोन से बड़ा हमला किया। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन के अनुसार, रूसी वायु रक्षा प्रणाली ने अधिकांश ड्रोन को राजधानी से काफी दूर ही नष्ट कर दिया, जबकि मॉस्को के करीब पहुंचे 85 ड्रोन भी मार गिराए गए। रूसी अधिकारियों का कहना है कि 11 से 18 जुलाई के बीच मॉस्को क्षेत्र की ओर कुल 1,892 ड्रोन भेजे गए थे। इनमें से अधिकांश को दूर ही रोक लिया गया, जबकि 207 ड्रोन राजधानी के नजदीक मार गिराए गए। इसी अवधि में एक रात में 370 से अधिक ड्रोन से भी हमला किया गया था। रूस ने यह भी दावा किया कि हालिया हमलों में ऑनलाइन रिटेल कंपनी वाइल्डबेरीज़ (Wildberries) के दो लॉजिस्टिक्स केंद्रों को निशाना बनाया गया, जिनमें आठ लोगों की मौत और कई अन्य के घायल होने की सूचना है। पेरू में दो भूकंप से 6 लोगों की मौत, 21 घायल; 48 मकान ढहे, राहत अभियान जारी
पेरू के मध्य पर्वतीय क्षेत्र में शनिवार रात आए दो भूकंपों में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई, जबकि 21 अन्य घायल हो गए। भूकंप से दर्जनों मकान ढह गए और करीब 300 लोग प्रभावित हुए हैं। राहत एवं बचाव दल मलबा हटाने और संभावित रूप से फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, पहला भूकंप 5.1 तीव्रता का था, जिसकी गहराई 24 किलोमीटर थी। इसके बाद 3.7 तीव्रता का दूसरा भूकंप 18 किलोमीटर की गहराई पर आया। दोनों झटकों का केंद्र राजधानी लीमा से लगभग 300 किलोमीटर पूर्व में स्थित है। वहीं, यूरोपीय-भूमध्यसागरीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने पहले भूकंप की तीव्रता 5.6 दर्ज की है। राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा संस्थान के प्रमुख लुइस वास्केज़ ने बताया कि शुरुआती आकलन के अनुसार 48 मकान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं और 18 अन्य क्षतिग्रस्त हुए हैं। प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी शिविर और टेंट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्र के अधिकांश मकान मिट्टी (एडोबी) की ईंटों से बने हैं, जिसके कारण उन्हें भारी नुकसान हुआ। पेरू प्रशांत महासागर के 'रिंग ऑफ फायर' क्षेत्र में स्थित है, जहां दुनिया की लगभग 85% भूकंपीय गतिविधियां होती हैं। इसी कारण देश में समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं। ब्रिटेन में विपक्ष की मांग- पाकिस्तान की सहायता और वीजा पर लगे रोक ब्रिटेन में विपक्षी दलों ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पाकिस्तान द्वारा बाल यौन अपराधी शबीर अहमद को वापस लेने से इनकार करने के बाद विपक्ष ने कहा है कि जब तक पाकिस्तान ऐसे दोषियों को स्वीकार नहीं करता, तब तक उसे दी जाने वाली आर्थिक सहायता और नए वीजा जारी करने पर रोक लगा दी जाए। पाकिस्तान में जन्मा शबीर अहमद रोचडेल ग्रूमिंग गैंग का प्रमुख सदस्य था। उसे बच्चियों से दुष्कर्म के 30 मामलों में दोषी ठहराया गया था। 22 साल की सजा में से 14 साल जेल काटने के बाद इस महीने उसे रिहा किया गया। ब्रिटेन ने 2016 में उसकी नागरिकता समाप्त कर दी थी, लेकिन 1971 के इमिग्रेशन एक्ट के तहत मिले कानूनी संरक्षण के कारण सरकार उसे निर्वासित नहीं कर सकी। गृह सचिव शबाना महमूद ने कहा है कि ऐसे अत्यंत गंभीर मामलों में कानून में संशोधन किया जाएगा। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने स्पष्ट किया है कि अहमद ने दशकों पहले अपनी पाकिस्तानी नागरिकता छोड़ दी थी और उसकी जिम्मेदारी अब ब्रिटेन की है, जहां उसका पालन-पोषण हुआ और उसने अपराध किए। इसी दौरान यह भी सामने आया कि ब्रिटेन ने अगले तीन वर्षों के लिए पाकिस्तान को 153 मिलियन पाउंड की विकास सहायता मंजूर की है। इस पर विपक्ष ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सहायता और वीजा दोनों तब तक रोके जाने चाहिए, जब तक पाकिस्तान शबीर अहमद जैसे दोषियों को वापस लेने के लिए तैयार नहीं होता। हिटलर की तारीफ करना पड़ा भारी: जर्मन अदालत ने डच दक्षिणपंथी कार्यकर्ता को किया तलब
हिटलर से मिलती-जुलती शक्ल के कारण चर्चित डच दक्षिणपंथी कार्यकर्ता स्टीफन वाइकैम्प को जर्मनी की अदालत ने नफरत फैलाने के आरोप में तलब किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने पिछले साल म्यूनस्टर में आयोजित एक दक्षिणपंथी रैली के दौरान एडॉल्फ हिटलर का सार्वजनिक रूप से महिमामंडन किया था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वाइकैम्प ने एक यूट्यूबर को दिए इंटरव्यू में कहा था कि "जर्मनी के प्रति मेरा प्यार एडॉल्फ हिटलर है।" उन्होंने हिटलर को "बेमिसाल विश्व चमत्कार" और "जीनियस" भी बताया था। इसी बयान को आधार बनाकर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। म्यूनस्टर जिला अदालत के अनुसार, मामले की पहली सुनवाई 24 जुलाई को होगी। यदि वाइकैम्प अदालत में पेश नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा सकता है। डच मीडिया के अनुसार, वाइकैम्प के खिलाफ नीदरलैंड में भी कई कानूनी मामले दर्ज हो चुके हैं। इनमें सार्वजनिक रूप से नाजी सलामी देने जैसे आरोप भी शामिल हैं। नॉर्वे ने 2011 आतंकी हमले के 77 पीड़ितों की याद में बनाया नया स्मारक
नॉर्वे ने 22 जुलाई 2011 के आतंकी हमले में जान गंवाने वाले 77 लोगों की स्मृति में नया राष्ट्रीय स्मारक स्थापित किया है। हमले की 15वीं बरसी से पहले रविवार को ओस्लो में इसका उद्घाटन किया गया। समारोह में पीड़ितों के परिजन, हमले से बचे लोग, सरकारी अधिकारी और नॉर्वे के क्राउन प्रिंस हाकोन शामिल हुए। 22 जुलाई 2011 को दक्षिणपंथी चरमपंथी एंडर्स बेहरिंग ब्रेविक ने पहले ओस्लो में कार बम विस्फोट किया, जिसमें आठ लोगों की मौत हुई। इसके बाद उसने उटोया द्वीप पर लेबर पार्टी के युवा शिविर में गोलीबारी कर 69 लोगों की हत्या कर दी। इस हमले में अधिकांश पीड़ित किशोर थे और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। ओस्लो के सरकारी क्षेत्र में बने 'अपहोल्डिंग' नामक इस स्मारक में 12 मीटर ऊंची पत्थर की मोज़ेक कला बनाई गई है, जिसमें उटोया द्वीप पर पाए जाने वाले एक छोटे पक्षी को दर्शाया गया है। स्मारक पर हमले में मारे गए सभी 77 लोगों के नाम अंकित किए गए हैं। हमले के दोषी एंडर्स बेहरिंग ब्रेविक को 2012 में 21 वर्ष की सजा सुनाई गई थी। बाद में उसने पैरोल और जेल की परिस्थितियों को लेकर कई कानूनी चुनौतियां दीं, लेकिन 2022 में उसकी पैरोल याचिका और 2024 में अलग-थलग रखे जाने के खिलाफ दायर मुकदमा दोनों अदालत ने खारिज कर दिए।
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