शिवराज के सीहोर में 43% परिवार के पास नल-जल नहीं:विदिशा में भी ऐसे 33% परिवार; सतना-छतरपुर समेत MP के 8 जिलों में आधे घर प्यासे
AdminAugust 8, 2026
मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत 77.21 प्रतिशत परिवारों तक नल जल पहुंचने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जिला स्तर के आधिकारिक आंकड़े इस दावे से अलग तस्वीर दिखाते हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर में करीब 43 प्रतिशत और विदिशा में करीब 33 प्रतिशत परिवारों तक अब भी नल का पानी नहीं पहुंचा है। वहीं, सतना, छतरपुर और सिंगरौली समेत प्रदेश के 8 जिलों में आधे से ज्यादा परिवार आज भी नल जल सुविधा से वंचित हैं। प्रदेश के 55 जिलों में से 23 जिलों में नल जल कवरेज 70 प्रतिशत से कम है। इनमें 8 जिलों की स्थिति सबसे खराब है, जहां आधे परिवारों तक भी नल जल नहीं पहुंच सका है। आधे परिवारों तक भी नहीं पहुंचा नल जल
जल जीवन मिशन के जिला स्तरीय आंकड़ों के मुताबिक मऊगंज में 49.86 प्रतिशत, अशोकनगर में 46.53 प्रतिशत, पन्ना में 45.26 प्रतिशत, सतना में 43.34 प्रतिशत, अलीराजपुर में 42.78 प्रतिशत, छतरपुर में 42.77 प्रतिशत, सिंगरौली में 40.62 प्रतिशत और मैहर में केवल 40.20 प्रतिशत परिवारों के पास ही घरेलू नल जल कनेक्शन हैं। यानी इन आठ जिलों में आधे से अधिक परिवार अब भी नल जल सुविधा से वंचित हैं। शिवराज के गृह जिले भी लक्ष्य से पीछे
रिपोर्ट के अनुसार सीहोर में 56.95 प्रतिशत और विदिशा में 66.67 प्रतिशत परिवारों तक ही नल जल पहुंचा है। इसका मतलब है कि सीहोर के करीब 43 प्रतिशत और विदिशा के करीब 33 प्रतिशत परिवारों को अभी भी नल का पानी उपलब्ध नहीं है। इनके अलावा जबलपुर, बड़वानी, डिंडोरी, टीकमगढ़, रतलाम, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, गुना, नीमच, रीवा, शिवपुरी और सिधी जैसे जिले भी 70 प्रतिशत कवरेज के स्तर तक नहीं पहुंच सके हैं। क्यों पिछड़ रहा कवरेज
लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) के अनुसार कम कवरेज वाले अधिकांश जिले बहु-ग्राम जल योजनाओं (एमवीएस) और थोक जल आपूर्ति परियोजनाओं पर निर्भर हैं। इनमें से कई परियोजनाएं अभी निर्माण, कार्यान्वयन या पूर्णता के विभिन्न चरणों में हैं। इनके पूरा होने के बाद कवरेज में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। जल गुणवत्ता जांच की सीमित व्यवस्था
प्रदेश में जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए कुल 155 प्रयोगशालाएं संचालित हैं। इनमें 103 उप-मंडल स्तर, 51 जिला स्तर और एक राज्य स्तरीय प्रयोगशाला शामिल है। सभी प्रयोगशालाओं में सूक्ष्मजीवी (माइक्रोबायोलॉजिकल) जांच की सुविधा है, लेकिन बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) की जांच केवल राज्य स्तरीय प्रयोगशाला में होती है। वहीं रासायनिक विषाक्तता की जांच की सुविधा अभी उपलब्ध नहीं है।
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