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दावा-खामेनेई के अंतिम संस्कार में विदेश मंत्री को पत्थर मारे:ईरानी राष्ट्रपति को गालियां दीं; कट्टरपंथियों का आरोप- सरकार अमेरिका के सामने झुकी

दावा-खामेनेई के अंतिम संस्कार में विदेश मंत्री को पत्थर मारे:ईरानी राष्ट्रपति को गालियां दीं; कट्टरपंथियों का आरोप- सरकार अमेरिका के सामने झुकी

अमेरिका के साथ युद्धविराम समझौते के बाद ईरान के भीतर राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आ गया है। राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ पर अब ईरान के कट्टरपंथी धड़े 'सॉफ्ट कूप' यानी बिना हथियारों के सत्तापलट करने का आरोप लगा रहे हैं। कट्टरपंथियों का कहना है कि इन नेताओं ने अमेरिका से समझौता करके ईरान के सिद्धांतों से समझौता किया है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह तेहरान में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान यह नाराजगी खुलकर दिखाई दी। राष्ट्रपति मसूद पजशकियान जब खामेनेई के ताबूत के साथ चल रहे थे, तब काले कपड़े पहने कुछ लोगों ने राष्ट्रपति के खिलाफ नारे लगाए। वहीं, अंतिम संस्कार स्थल से कुछ दूरी पर विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर पत्थर फेंके गए और उन्हें देश बेचने वाला गद्दार कहा गया। हालात इतने बिगड़ गए कि उन्हें वहां से भागना पड़ा। कट्टरपंथियों का आरोप- अमेरिका के सामने सरकार झुक गई CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी गुटों का मानना है कि अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने के बजाय सरकार ने अमेरिका के सामने झुककर समझौता कर लिया। उनका कहना है कि यह समझौता नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के आदेशों के खिलाफ किया गया। मुजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उन्होंने न तो देश को संबोधित किया है और न ही खुलकर अपनी सत्ता का प्रदर्शन किया है, जबकि उनके नाम पर सरकार बातचीत भी कर रही है और देश भी चला रही है। कट्टरपंथियों का आरोप है कि मुजतबा की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर मौजूदा सरकार अपनी ताकत बढ़ाने में लगी है। उनका दावा है कि वे संसद को कमजोर करना चाहती है। मुजतबा खामेनेई के लगातार सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने के कारण राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची युद्ध के बाद ईरान के सबसे प्रमुख चेहरे बन गए हैं। कट्टरपंथियों की नाराजगी की एक बड़ी वजह यही है। अंतिम संस्कार में जंग का संदेश, कुछ दिन बाद ही टूट गया युद्धविराम ईरान में युद्ध के दौरान राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की लगातार अपील की जा रही थी, लेकिन अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में कट्टरपंथी गुटों का दबदबा साफ दिखाई दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी गुटों ने इस मौके का इस्तेमाल अमेरिका के खिलाफ फिर से युद्ध छेड़ने की मांग उठाने और ट्रम्प सरकार के साथ हुए किसी भी समझौते को पूरी तरह खारिज करने के लिए किया। कट्टरपंथियों की यह इच्छा कुछ ही दिनों बाद पूरी होती नजर आई। इस सप्ताह ईरान और अमेरिका के बीच हुआ नाजुक युद्धविराम लगभग टूट गया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को निशाना बनाकर इस समुद्री मार्ग पर अपना कंट्रोल दिखाने की कोशिश की। इसके जवाब में अमेरिका ने जवाबी हमले किए। राष्ट्रपति को खुलेआम दी गई थी जान से मारने की धमकी युद्ध दोबारा शुरू होने से पहले भी कट्टरपंथी नेता अमेरिका से समझौता करने वाले अधिकारियों पर लगातार हमला बोल रहे थे। ईरानी शासन से जुड़े धार्मिक गायक मोहम्मद अली बख्शी ने एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति मसूद पजशकियान को खुलेआम धमकी दी थी। उन्होंने कहा- राष्ट्रपति महोदय, अगर सुप्रीम लीडर की शर्तें पूरी नहीं हुईं तो हमारी तलवार होगी और आपका गला होगा। हम आपकी जिंदगी को जहन्नुम बना देंगे। राष्ट्रपति को जान से मारने की इस धमकी की ईरान में काफी आलोचना हुई, लेकिन बख्शी के खिलाफ किसी कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई। गालिबाफ भी कट्टरपंथियों के निशाने पर कट्टरपंथियों के निशाने पर सिर्फ राष्ट्रपति और विदेश मंत्री ही नहीं हैं। अमेरिका के साथ बातचीत करने वाले मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ भी उनके निशाने पर हैं। गालिबाफ पहले रिवोल्यूशनरी गार्ड्स में कमांडर रह चुके हैं और लंबे समय से ईरान की राजनीति में सक्रिय हैं। कट्टरपंथी सांसद कमरान गजनफारी ने जुलाई की शुरुआत में जारी एक वीडियो मैसेज में आरोप लगाया कि मौजूदा नेतृत्व सर्वोच्च नेता और संसद की भूमिका कमजोर कर रहा है। कट्टरपंथियों को किनारे करने की कोशिश तेज ईरान में करीब चार महीने बाद 14 जुलाई को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। इसमें सत्ता संघर्ष खुलकर सामने आया और अमेरिका के साथ हुए समझौते का विरोध करने वाले दो प्रमुख कट्टरपंथी सांसदों को अहम संसदीय पदों से हटा दिया गया। सबसे पहले अमेरिका से समझौते का सबसे ज्यादा विरोध करने वाले कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियन को संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग (नेशनल सिक्योरिटी कमीशन) से हटा दिया गया। इसके अलावा इसके प्रवक्ता रहे इब्राहिम रेजाई को भी हटा दिया गया। नबावियन पहले अमेरिका के साथ बातचीत करने वाले ईरानी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रह चुके हैं, लेकिन बाद में उन्होंने वार्ता का विरोध शुरू कर दिया। आरोप है कि उन्होंने पिछले महीने समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले उसका मसौदा मीडिया में लीक कर दिया था, ताकि समझौता रुक सके। विशेषज्ञ बोले- सरकार कट्टरपंथियों का असर कम करना चाहती है एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान की मौजूदा सरकार अब इन कट्टरपंथी गुटों का प्रभाव कम करने की कोशिश कर रही है। हामिदरेजा अजीजी ने CNN से कहा- हम देख रहे हैं कि गालिबाफ इन कट्टरपंथी नेताओं को धीरे-धीरे किनारे कर रहे हैं। ये लोग अब व्यवस्था के लिए बोझ बन चुके हैं और देश में अस्थिरता बढ़ने के साथ अपनी आपसी लड़ाई भी खुलकर सामने ला रहे हैं। हालांकि इन कट्टरपंथियों की संख्या ज्यादा नहीं है, लेकिन संसद और सरकारी न्यूज एजेंसीज आईआरआईबी (IRIB) जैसे कई प्रभावशाली संस्थानों में उनकी मजबूत पकड़ है। इनकी वास्तविक राजनीतिक ताकत कितनी है, यह साफ नहीं है। इस धड़े के प्रमुख नेता और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख सईद जलीली को 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में 1.3 करोड़ से ज्यादा वोट मिले थे। वे चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे थे। ईरान की कुल आबादी करीब 9.3 करोड़ है। ट्रम्प ने कहा था- ईरान भीतर से बंटा हुआ है युद्ध और कूटनीतिक बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कई बार कह चुके हैं कि ईरान का नेतृत्व गंभीर अंदरूनी मतभेदों से जूझ रहा है और यही किसी समझौते में सबसे बड़ी बाधा है। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार और कट्टरपंथियों के बीच मतभेद जरूर हैं, लेकिन पूरे शासन की प्राथमिकता अब भी एक जैसी है। उनका लक्ष्य ऐसा समझौता करना है जिससे युद्ध खत्म हो, ईरान को प्रतिबंधों से राहत मिले और होर्मुज स्ट्रेट पर उसका प्रभाव भी बना रहे। अमेरिका से फिर जंग चाहते हैं कट्टरपंथी CNN के अनुसार, मुजतबा खामेनेई का लगातार सार्वजनिक रूप से सामने न आना, युद्धविराम को लेकर उनका सीमित समर्थन, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का बढ़ता प्रभाव और अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में जुटी भारी भीड़ ने कट्टरपंथियों का मनोबल बढ़ा दिया है। अब वे अमेरिका और इजराइल के खिलाफ युद्ध जारी रखने की खुलकर मांग कर रहे हैं। ईरान के पूर्व विदेश मंत्री और कट्टरपंथी नेता मनूचेहर मुत्ताकी ने बुधवार को एक टीवी इंटरव्यू में कहा, मेरा सुझाव है कि हम क्षेत्र में मौजूद अमेरिका के किसी सैन्य अड्डे पर जाएं, जहां सैकड़ों या शायद हजारों अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। अगर हम उनमें से 100 सैनिकों को पकड़कर ईरान ले आएं, तो इतना ही काफी होगा। यह बयान दिखाता है कि अमेरिका के साथ हुए समझौते के बावजूद ईरान के भीतर सत्ता संघर्ष खत्म नहीं हुआ है। एक तरफ सरकार कूटनीतिक रास्ते से प्रतिबंधों में राहत और युद्ध खत्म करने की कोशिश कर रही है, वहीं कट्टरपंथी धड़े अब भी अमेरिका और इजराइल के खिलाफ टकराव की नीति पर अड़े हुए हैं। इससे आने वाले समय में ईरान की आंतरिक राजनीति और विदेश नीति दोनों पर बड़ा असर पड़ सकता है। ----------------------------- ईरान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका का लगातार सातवीं रात ईरान पर हमला:भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट पर अटैक; ईरान ने कतर-कुवैत पर दागीं मिसाइलें अमेरिका ने शनिवार को लगातार सातवीं रात ईरान पर एयरस्ट्राइक की। इन हमलों में पुल, एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट का एक कंट्रोल (निगरानी) टावर निशाना बना। जवाब में ईरान ने कतर, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन की ओर मिसाइलें दागीं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

HDFC बैंक का मुनाफा 5% बढ़कर ₹19,060 करोड़:नेट इंटरेस्ट इनकम 6.7% बढ़ी; बैंक के नतीजे एक्सपर्ट्स के अनुमान से कम रहे

HDFC बैंक का मुनाफा 5% बढ़कर ₹19,060 करोड़:नेट इंटरेस्ट इनकम 6.7% बढ़ी; बैंक के नतीजे एक्सपर्ट्स के अनुमान से कम रहे

HDFC बैंक लिमिटेड ने शनिवार को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजे घोषित कर दिए हैं। इस तिमाही (Q1 FY27) में बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 4.98% बढ़कर 19,059.72 करोड़ रुपए रहा। हालांकि, यह मुनाफा CNBC-TV18 पोल के 19,332 करोड़ रुपए के अनुमान से कम रहा। नेट इंटरेस्ट इनकम ₹33,535 करोड़ के पार बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में सालाना आधार पर 6.7% की बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़कर 33,535.95 करोड़ रुपए पर पहुंच गई है। हालांकि, नेट इंटरेस्ट इनकम भी बाजार के 34,353 करोड़ रुपए के पोल अनुमान को पार करने में चूक गई। बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन 3.26% रहा पहली तिमाही में HDFC बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) कुल एसेट्स पर 3.26% दर्ज किया गया है। वहीं, अगर ब्याज अर्जित करने वाली संपत्तियों यानी इंटरेस्ट अर्निंग एसेट्स के आधार पर देखें तो यह मार्जिन 3.40% रहा है। एसेट क्वालिटी में मामूली बदलाव, ग्रॉस NPA 1.17% एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर बैंक के ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPAs) 30 जून, 2026 तक ग्रॉस एडवांस के 1.17% पर रहे। 31 मार्च 2026 को यह आंकड़ा 1.15% था, जबकि एक साल पहले की समान तिमाही में यह 1.40% था। वहीं, 30 जून, 2026 तक बैंक का नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NNPAs) नेट एडवांस का 0.41% रहा। प्रोविजनिंग और क्रेडिट कॉस्ट का हाल पहली तिमाही में बैंक का कुल प्रोविजंस और कंटिंगेंसीज (प्रॉविजन्स एंड कंटिंगेंसीज) ₹3,060 करोड़ रहा। इसके साथ ही तिमाही के लिए बैंक का कुल क्रेडिट कॉस्ट रेशियो 0.40% दर्ज किया गया है। इस साल 17.2% टूट चुका है बैंक का शेयर शुक्रवार को HDFC बैंक का शेयर 1.4% चढ़कर 819.60 रुपए के स्तर पर बंद हुआ था। साल 2026 में अब तक इस स्टॉक में 17.2% की गिरावट आ चुकी है, जबकि इस दौरान निफ्टी 50 इंडेक्स में 6.9% की कमजोरी देखी गई है। क्या होती है नेट इंटरेस्ट इनकम और नेट इंटरेस्ट मार्जिन? नॉन परफॉर्मिंग एसेट या NPA क्या है? जब कोई व्यक्ति या संस्था किसी बैंक से लोन लेकर उसे वापस नहीं करती, तो उसे बैड लोन या नॉन परफॉर्मिंग एसेट या NPA कहा जाता है। यानी इन लोन्स की रिकवरी की उम्मीद काफी कम होती है। नतीजतन बैंकों का पैसा डूब जाता है और बैंक घाटे में चला जाता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के मुताबिक, अगर किसी बैंक लोन की किस्त 90 दिनों तक यानी तीन महीने तक नहीं चुकाई जाती है, तो उस लोन को NPA घोषित कर दिया जाता है। अन्य वित्तीय संस्थाओं के मामले में यह सीमा 120 दिन की होती है। बुक को क्लियर करने के लिए बैंकों को ऐसा करना होता है।

पाकिस्तान में पेट्रोल 5.44 और डीजल 31.05 रुपया महंगा:पेट्रोल 316.15 और हाई-स्पीड डीजल 354.35 रुपया लीटर मिल रहा, नई कीमतें 18 जुलाई से लागू

पाकिस्तान में पेट्रोल 5.44 और डीजल 31.05 रुपया महंगा:पेट्रोल 316.15 और हाई-स्पीड डीजल 354.35 रुपया लीटर मिल रहा, नई कीमतें 18 जुलाई से लागू

पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल के दाम में 5.44 रुपया (पाकिस्तानी रुपया) प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल में 31.05 रुपया प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 316.15 रुपया और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 354.35 रुपया लीटर हो गई है। नई कीमतें 18 जुलाई से लागू हो गई हैं। इसके अलावा सरकार ने अब पेट्रोल-डीजल की कीमतें साप्ताहिक की जगह रोजाना तय करने का फैसला किया है। फरवरी से शुरू हुआ था बढ़ने का सिलसिला हालिया बढ़ोतरी के बावजूद दोनों ईंधन अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई (पीक लेवल) से नीचे बने हुए हैं। 3 अप्रैल को डीजल की कीमत 520.35 रुपया प्रति लीटर के ऑल-टाइम हाई स्तर पर पहुंच गई थी। ईंधन की कीमतों में यह तेजी 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद देखने को मिली थी, जब डीजल 281 रुपया प्रति लीटर के स्तर पर था। वहीं दूसरी ओर, पेट्रोल की कीमत भी 3 अप्रैल को 458.41 रुपया के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी, जिसकी शुरुआत मार्च के पहले हफ्ते में 266 रुपया प्रति लीटर से हुई थी। अब हर रोज तय होंगे दाम पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच जंग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बदल रही हैं। इसे देखते हुए केंद्रीय कैबिनेट और प्रधानमंत्री ने फैसला किया है कि अब ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (OGRA) को रोजाना कीमतें तय करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। OGRA न सिर्फ अपनी वेबसाइट पर रोज सुबह नए रेट जारी करेगी, बल्कि यह भी सार्वजनिक करेगी कि पेट्रोल पंप तक पहुंचते-पहुंचते टैक्स, मार्जिन और अन्य खर्चों की वजह से कीमतें किस तरह तय हुईं। इससे पहले मार्च की शुरुआत से सरकार हर हफ्ते कीमतों की समीक्षा कर रही थी। एक लीटर तेल पर 105 रुपया तो सिर्फ टैक्स, डीलर्स ने दी आंदोलन की चेतावनी आम जनता को मिलने वाले पेट्रोल-डीजल पर सरकार भारी-भरकम टैक्स वसूल रही है। इस समय दोनों पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर प्रति लीटर लगभग 105 रुपया का टैक्स लिया जा रहा है। इसमें कस्टम ड्यूटी, पेट्रोलियम लेवी, क्लाइमेट सपोर्ट लेवी और इनलैंड फ्रेट इक्वलाइजेशन मार्जिन शामिल हैं। दूसरी ओर, ऑल पाकिस्तान डीलर्स एसोसिएशन ने सरकार के 'डेली प्राइसिंग' यानी रोज दाम बदलने के फैसले को सिरे से खारिज कर दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि रोज दाम बदलने से उनके बिजनेस और स्टॉक मैनेजमेंट में दिक्कतें आएंगी। डीलर्स ने चेतावनी दी है कि वे इसके खिलाफ अगले हफ्ते एक बड़ा विरोध प्रदर्शन और हड़ताल कर सकते हैं। मिडिल क्लास और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर पेट्रोल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर देश के मिडिल और लोअर-मिडिल क्लास पर पड़ता है, क्योंकि इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से प्राइवेट गाड़ियों, छोटी कारों, ऑटो रिक्शा और टू-व्हीलर्स में होता है। वहीं, डीजल महंगा होने से पूरे देश में महंगाई बढ़ने का खतरा है, क्योंकि इसका इस्तेमाल भारी कमर्शियल वाहनों (ट्रकों-बसों), पावर प्लांट्स और बड़े जनरेटरों में होता है। पाकिस्तान में हर महीने करीब 7 से 8 लाख टन पेट्रोल और डीजल की भारी-भरकम बिक्री होती है, जबकि केरोसिन (मिट्टी के तेल) की मासिक मांग सिर्फ 10 हजार टन ही है। यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल सरकार के लिए रेवेन्यू जुटाने का सबसे बड़ा जरिया बने हुए हैं।

अब उमंग एप से एक्टिवेट होगा UAN:फेस ऑथेंटिकेशन भी करना होगा, यहां जानें एक्टिवेट करने की पूरी प्रोसेस

अब उमंग एप से एक्टिवेट होगा UAN:फेस ऑथेंटिकेशन भी करना होगा, यहां जानें एक्टिवेट करने की पूरी प्रोसेस

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO ने अपने करोड़ों सब्सक्राइबर्स के लिए एक बड़ा बदलाव किया है। EPFO ने अब अपनी आधिकारिक वेबसाइट से यूनिवर्सल अकाउंट नंबर यानी UAN एक्टिवेशन और नया UAN जनरेट करने की सुविधा को बंद कर दिया है। अब इन दोनों सर्विसेज को ‘उमंग’ एप पर शिफ्ट कर दिया गया है। इसके साथ ही सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए आधार-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन को जरूरी कर दिया गया है। EPFO के मुताबिक, डेटाबेस कंसॉलिडेशन और सॉफ्टवेयर अपग्रेड के बाद ऑनलाइन सर्विसेज को फास्ट और ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। स्टेटस चेक करने का तरीका UAN एक्टिवेट हुआ है या नहीं, यह चेक करने के लिए उमंग एप में 'UAN Services Through Face Auth' के तहत 'UAN allotment and activation' ऑप्शन पर जाएं। वहां अपना UAN, आधार नंबर और मोबाइल नंबर डालकर कंसेंट बॉक्स को टिक करें और 'Send OTP' पर क्लिक करें। अगर प्रोसेस सफल रहा होगा, तो स्क्रीन पर मैसेज दिखेगा- 'The UAN entered is already activated'। इस साल भी 8.25% मिलेगी ब्याज दर वित्त मंत्रालय ने इस फाइनेंशियल ईयर यानी FY2025-26 के लिए EPF पर 8.25% की ब्याज दर को मंजूरी दे दी है। यह लगातार तीसरा मौका है जब सब्सक्राइबर्स को 8.25% की दर से ब्याज मिल रहा है। पैसे निकालने की लिमिट: 25% बैलेंस मेंटेन करना जरूरी EPFO के नियमों के अनुसार, सब्सक्राइबर्स को अपने EPF अकाउंट में हर समय कम से कम 25% का मिनिमम बैलेंस मेंटेन करना जरूरी होता है। इसका मतलब यह है कि अगर आप नौकरी के दौरान आंशिक रूप से पैसा निकालना चाहते हैं, तो अपने कुल फंड का अधिकतम 75% हिस्सा ही निकाल सकते हैं। फुल सेटलमेंट केवल नौकरी छोड़ने की स्थिति में ही मंजूर किया जाता है। उदहारण के लिए: अगर किसी सब्सक्राइबर के अकाउंट में (कर्मचारी और कंपनी दोनों का हिस्सा मिलाकर) कुल ₹2 लाख जमा हैं, तो वह पार्शियल विड्रॉल के तौर पर अधिकतम ₹1,50,000 ही निकाल सकेगा, जबकि ₹50,000 का मिनिमम बैलेंस अकाउंट में ही रहेगा।

अमेरिका-ईरान युद्ध में अब पानी भी निशाने पर:अमेरिकी हमले में ईरान का वाटर प्लांट तबाह, जवाब में कुवैत के प्लांट पर हमला

अमेरिका-ईरान युद्ध में अब पानी भी निशाने पर:अमेरिकी हमले में ईरान का वाटर प्लांट तबाह, जवाब में कुवैत के प्लांट पर हमला

अमेरिका और ईरान के बीच अब समुद्र के खारे पानी को साफ करने वाले प्लांट्स को निशाना बनाया जा रहा है। ईरान ने शनिवार को दावा किया कि अमेरिका ने होर्मोजगान प्रांत में हवाई हमला कर बोंजी डिसैलिनेशन (वाटर) प्लांट को तबाह कर दिया। इस हमले के बाद 20 गांवों के करीब 10 हजार लोगों की पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। वहीं कुवैत ने कहा कि ईरान ने लगातार दूसरे दिन उसके पानी के प्लांट को निशान बनाया है। कुवैत में पीने का लगभग 90 प्रतिशत खारे पानी को मीठी बनाने की प्रक्रिया (डिसैलिनेशन) से मिलता है। कुवैत की तरफ से कहा गया है कि इसमें किसी भी तरह की रुकावट रेगिस्तान वाले छोटे से देश में जीवन के लिए खतरा पैदा कर सकती है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च कामयाब:स्काईरूट एयरोस्पेस ने खुद बनाकर अंतरिक्ष में भेजा, 2 दोस्तों ने इसरो छोड़कर बनाई थी यह कंपनी

भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च कामयाब:स्काईरूट एयरोस्पेस ने खुद बनाकर अंतरिक्ष में भेजा, 2 दोस्तों ने इसरो छोड़कर बनाई थी यह कंपनी

हैदराबाद की स्काईरूट एयरोस्पेस ने शनिवार 18 जुलाई को भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 लॉन्च किया। यह टेस्ट पहले ही प्रयास में कामयाब रहा। विक्रम-1 को स्काईरूट एयरोस्पेस ने तैयार किया और लॉन्चिंग भी खुद ही की। सिर्फ लॉन्चपैड इसरो का था। स्काईरूट एयरोस्पेस कंपनी की स्थापना 2018 में दो दोस्तों पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका ने की थी। विक्रम-1 को आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा में इसरो के सतीश धवन स्पेस सेंटर से दोपहर 12:05 बजे लॉन्च किया गया। स्काईरूट ने 2022 में विक्रम-एस सब-ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया था, जो 89.5 km की ऊंचाई तक गया था। अब विक्रम-1 450 km की पृथ्वी की सर्कुलर निचली कक्षा तक पहुंच गया है। इसे भारत के स्पेस सेक्टर के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। ऑर्बिटल रॉकेट: जब कोई रॉकेट पृथ्वी के चारों ओर लगातार चक्कर लगाने लायक स्पीड हासिल कर लेता है, तो वह ऑर्बिटल रॉकेट कहलाता है। यह स्पीड लगभग 28,000 किमी/घंटा या 7.8 किमी/सेकंड होती है। सब-ऑर्बिटल रॉकेट: रॉकेट अंतरिक्ष की सीमा तक जाकर लौट आए, तो उसे सब-ऑर्बिटल रॉकेट कहते हैं। आमतौर पर 100 किमी की ऊंचाई पर अंतरिक्ष की शुरुआत मानी जाती है। खबर में आगे बढ़ने से पहले लॉन्च से जुड़ी 4 तस्वीरें… सोने के कलाम, साराभाई और सीवी रमन भी भेजे गए इस लॉन्चिंग को 'मिशन आगमन' नाम दिया गया। इसके तहत विक्रम-1 रॉकेट अपने साथ टेक्नोलॉजी से लेकर कला से जुड़े पेलोड्स अंतरिक्ष में भेजे गए: कॉमर्शियल और टेक्नोलॉजी के ये पेलोड्स भेजे गए 18 कैरेट सोने से बना आर्ट पीस भी स्पेस में भेजा गया कॉस्मोस डायमंड्स की कलाकृति "कॉस्मिक ब्लूम" और एक खास माइक्रो-आर्ट पीस भी रॉकेट में भेजा गया। यह माइक्रो-आर्ट पीस 18 कैरेट सोने से बना छोटा सा रॉकेट है। इस पर वैज्ञानिक सर सीवी रमन, डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. कलाम की सूक्ष्म मूर्तियां उकेरी गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाथ से लिखा गया एक पोस्टकार्ड भी रॉकेट में भेजा गया, जिस पर 'वंदे मातरम' शब्द अंकित हैं। हल्के कार्बन-कंपोजिट से बना है पूरा रॉकेट विक्रम-1 पूरी तरह से हल्के और मजबूत कार्बन-कंपोजिट स्ट्रक्चर से बना पहला ऑर्बिटल रॉकेट है। कार्बन फाइबर स्टील की तुलना में पांच गुना हल्का होता है। इससे रॉकेट का वजन कम हो जाता है, जिससे इसकी ईंधन दक्षता बढ़ जाती है। रॉकेट को ऊर्जा देने के लिए इसमें तीन सॉलिड-फ्यूल स्टेज और एक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल दिया गया है। 1. तीन सॉलिड-फ्यूल स्टेज: इसे आप रॉकेट के नीचे लगे तीन बेहद ताकतवर 'बूस्टर्स' की तरह समझ सकते हैं, जिनमें ठोस ईंधन जैसे बारूद की तरह का ठोस केमिकल भरा होता है. रॉकेट को जमीन से उठाकर आसमान की तरफ धकेलने के लिए शुरुआत में बहुत भारी ताकत की जरूरत होती है। ये तीनों सॉलिड स्टेज एक-एक करके जलते हैं और रॉकेट को शुरुआती धक्का देकर अंतरिक्ष की सीमा लो अर्थ ऑर्बिट के पास पहुंचा देते हैं। 2. लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल यह रॉकेट के ऊपरी हिस्से में लगा एक बेहद बारीक और स्मार्ट तरल ईंधन वाला छोटा इंजन होता है। जब रॉकेट अंतरिक्ष में पहुंच जाता है, तो वहां ठोस ईंधन काम नहीं आता क्योंकि उसे अपनी मर्जी से ऑन या ऑफ नहीं किया जा सकता। यहां 'लिक्विड मॉड्यूल' काम आता है। यह अंतरिक्ष में सैटेलाइट को सही दिशा देने, रॉकेट की रफ्तार कम-ज्यादा करने और सैटेलाइट को उसकी तय की गई कक्षा में 'एडजस्ट' यानी स्थापित करने का काम करता है। अब 5 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल 1: 'स्काईरूट एयरोस्पेस' की शुरुआत कब और किस उद्देश्य से हुई थी? जवाब: स्काईरूट की शुरुआत करीब 8 साल पहले 2018 में हुई थी। इसे शुरू करने का मुख्य उद्देश्य भारत में ही बेहद किफायती और भरोसेमंद रॉकेट्स का निर्माण करना है, ताकि दुनियाभर के सैटेलाइट ऑपरेटर्स को ऑन-डिमांड और बजट-फ्रेंडली लॉन्चिंग सॉल्यूशंस दिए जा सकें। हाल ही में ये कंपनी देश की पहली स्पेस टेक यूनिकॉर्न बनी थी। यानी कंपनी की वैल्यूएशन 1 बिलियन डॉलर के पार पहुंच गई थी। सवाल 2: इस रॉकेट का नाम 'विक्रम-1' क्यों रखा गया है और इसका क्या महत्व है? जवाब: इस रॉकेट का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में 'विक्रम-1' रखा गया है। डॉ. साराभाई ने ही देश के स्पेस सेक्टर की मजबूत नींव रखी थी। स्काईरूट अपने सभी रॉकेट्स के नाम उनके सम्मान में इसी सीरीज पर रखती है। साल 2022 में लॉन्च किया गया पहला सबऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-एस' भी इसी सम्मान श्रृंखला का हिस्सा था। सवाल 3: इस लॉन्चिंग से भारत के स्पेस सेक्टर को क्या फायदे होंगे? जवाब: यह लॉन्चिंग भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए गेम चेंजर हो सकती है: सवाल 4: स्काईरूट के फाउंडर्स कौन हैं और उनका क्या कहना है? जवाब: स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका ने मिलकर की है। पवन ने कहा कि यह हमारी पहली टेस्ट फ्लाइट है और इससे हमें अंतरिक्ष की कक्षा में रॉकेट के व्यवहार का बेहद कीमती डेटा मिलेगा। नागा ने कहा कि हमारा और हमारी पूरी टीम का आठ वर्षों का कठोर प्रयास आज इस ऐतिहासिक मील के पत्थर के रूप में साकार हो रहा है। सवाल 5: साल 2022 में लॉन्च हुए 'विक्रम-एस' और इस नए 'विक्रम-1' रॉकेट में क्या अंतर है? जवाब: इन दोनों रॉकेट्स में तकनीक और क्षमता के स्तर पर बड़ा अंतर है: विक्रम S और विक्रम-1 में अंतर भारत में कितनी प्राइवेट स्पेस कंपनियां हैं? सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप रजिस्टर्ड हैं। इनमें सैटेलाइट, लॉन्च व्हीकल, प्रोपल्शन, स्पेस डेटा, ग्राउंड सिस्टम और डिफेंस-स्पेस टेक्नोलॉजी पर काम करने वाली कंपनियां शामिल हैं। 2014 में सिर्फ 1 प्राइवेट स्पेस स्टार्टअप था।

रिलायंस का मुनाफा 22% घटकर ₹20,946 करोड़:देश में जल्द चलेंगे प्लास्टिक-नोट, RBI ने जारी किया टेंडर; एअर इंडिया का नया एप लॉन्च

रिलायंस का मुनाफा 22% घटकर ₹20,946 करोड़:देश में जल्द चलेंगे प्लास्टिक-नोट, RBI ने जारी किया टेंडर; एअर इंडिया का नया एप लॉन्च

कल की बड़ी खबर रिलायंस से जुड़ी रही। रिलायंस इंडस्ट्रीज का वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 22.40% घटकर 20,946 करोड़ रुपए रहा। वहीं रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जल्द ही देश में प्लास्टिक यानी पॉलीमर से बने नोटों का पहला पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें... 1. रिलायंस का मुनाफा सालाना 22% घटकर ₹20,946 करोड़: पिछली तिमाही से 23% ज्यादा रहा; पहली तिमाही में रेवेन्यू 25% बढ़कर ₹3.11 लाख करोड़ पहुंचा रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 22.40% घटकर 20,946 करोड़ रुपए रहा। एक साल पहले की समान तिमाही में मुनाफा ₹26,994 करोड़ था। तिमाही आधार पर कंपनी का मुनाफा 23% बढ़ा है। पिछली तिमाही यानी वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंपनी को 16,971 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. देश में जल्द चलेंगे प्लास्टिक-नोट, RBI ने जारी किया टेंडर: ₹10 और ₹20 के नोटों से शुरू होगा ट्रायल, 2027 में फुल-स्केल लॉन्च की उम्मीद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जल्द ही देश में प्लास्टिक यानी पॉलीमर से बने नोटों का पहला पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह देश में नए जनरेशन की करेंसी लाने की RBI के प्लान का अगला कदम है। रिजर्व बैंक शुरुआती फेज में सबसे पहले छोटी वैल्यू के नोटों पर इसकी टेस्टिंग करेगा। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पहला पायलट प्रोजेक्ट ₹10 और ₹20 वैल्यू के छोटे नोटों के साथ शुरू होने की उम्मीद है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. अमेरिका को टक्कर देने आया चीन का AI मॉडल: किमी K3 में इंसानों जैसी आंखें और दिमाग; कोडिंग और रिसर्च मिनटों में करेगा चीनी कंपनी मूनशॉट AI ने अपना नया AI मॉडल किमी K3 पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह 2.8 ट्रिलियन पैरामीटर्स वाला दुनिया का पहला ओपन मॉडल है। इसमें 1 मिलियन टोकन की कॉन्टेक्स्ट विंडो दी गई है। पिछले मॉडल किमी K2 की तुलना में इसकी स्केलिंग दक्षता करीब 2.5 गुना बेहतर है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. एअर इंडिया का नया एप लॉन्च: फ्लाइट लेट या कैंसिल होने पर होम स्क्रीन पर फ्री होटल-कैब की डिटेल मिलेगी, पेमेंट भी आसान होगा एअर इंडिया ने सफर आसान बनाने के लिए अपने मोबाइल एप को नए फीचर्स के साथ अपडेट किया है। अब इस एप के जरिए न केवल टिकट बुकिंग पहले से कहीं ज्यादा तेजी से होगी, बल्कि फ्लाइट लेट या कैंसिल होने पर यात्रियों को एयरपोर्ट पर परेशान नहीं होना पड़ेगा। ऐसी किसी भी स्थिति में होटल में ठहरने और वहां तक जाने के लिए कैब की पूरी जानकारी सीधे एप की होम स्क्रीन पर ही मिलेगी। इसके साथ ही एप के पेमेंट सिस्टम को भी अपग्रेड किया गया है, जिससे टिकट बुक करना और पेमेंट करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. फरारी अमाल्फी स्पाइडर लॉन्च, कीमत ₹4.6 करोड़: 3.3 सेकेंड में 100kmph की स्पीड, 15.6-इंच डिस्प्ले और ADAS जैसे फीचर्स इटली की सुपरकार बनाने कंपनी फरारी ने आज भारत में नई कनवर्टिबल कार अमाल्फी स्पाइडर लॉन्च की है। ये 15.6 इंच डिजिटल डिस्प्ले और ADAS जैसे सेफ्टी फीचर्स के साथ आई है। कंपनी का दावा है कि यह 3.3 सेकेंड में 100kmph की स्पीड से दौड़ सकती है। कंपनी ने भारत में इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 4.6 करोड़ रुपए रखी है। यह अपने कूपे मॉडल की तुलना में करीब 52 लाख रुपए महंगी है, जिसकी मौजूदा कीमत 4.08 करोड़ रुपए है। नई अमाल्फी स्पाइडर की बुकिंग शुरू हो चुकी है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए...

अर्जेंटीना-स्पेन को फाइनल में पहुंचाने वाले 10 गेमचेंजर:मेसी ने सबसे ज्यादा 8 गोल दागे, स्पेनिश गोलकीपर सिमोन ने सिर्फ 1 गोल खाया

अर्जेंटीना-स्पेन को फाइनल में पहुंचाने वाले 10 गेमचेंजर:मेसी ने सबसे ज्यादा 8 गोल दागे, स्पेनिश गोलकीपर सिमोन ने सिर्फ 1 गोल खाया

102 मैच, 31 दिन और 46 टीमों के बाद फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 को दो फाइनलिस्ट मिल गए हैं। डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार खिताबी मुकाबले में पहुंचा है, जबकि स्पेन 16 साल बाद फाइनल खेलेगा। दोनों टीमें 19 जुलाई की रात 12:30 बजे ट्रॉफी के लिए आमने-सामने होंगी। फाइनल तक पहुंचने का रास्ता दोनों टीमों के लिए आसान नहीं रहा। कहीं आखिरी मिनट में मैच पलटा, कहीं एक्स्ट्रा टाइम में जीत मिली तो कहीं गोलकीपर ने शानदार बचाव कर टीम को बाहर होने से बचाया। अर्जेंटीना और स्पेन के इस सफर में 10 खिलाड़ी ऐसे रहे, जो जीत की सबसे बड़ी वजह बने। अर्जेंटीना के टॉप-5 प्लेयर्स 1. लियोनेल मेसी, कप्तान, फॉरवर्ड 39 साल के मेसी एक बार फिर अर्जेंटीना के सबसे बड़े मैच विनर साबित हुए। ग्रुप स्टेज में अल्जीरिया के खिलाफ हैट्रिक लगाई। सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ टीम 85 मिनट तक 0-1 से पिछड़ रही थी, लेकिन आखिरी सात मिनट में मेसी ने दो असिस्ट देकर मैच पलट दिया। उनके नाम पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 8 गोल हैं। 2. एंजो फर्नांडीज, मिडफील्डर सेमीफाइनल में एंजो ने इंग्लैंड के खिलाफ 25 गज दूर से शानदार शॉट लगाकर बराबरी दिलाई। डिफेंस और अटैक के बीच तालमेल बैठाने, गेंद पर नियंत्रण रखने और खेल की रफ्तार तय करने में उनकी भूमिका बेहद अहम रही। 3. लॉटारो मार्टिनेज, स्ट्राइकर इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल मैच 1-1 से बराबरी पर था। लॉटारो बतौर सब्स्टिट्यूट खेलने उतरे। इंजरी टाइम के दूसरे मिनट में उन्होंने हेडर से गोल कर अर्जेंटीना को लगातार दूसरे वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंचा दिया। 4. क्रिस्टियन रोमेरो, सेंटर बैक राउंड ऑफ-16 में मिस्र के खिलाफ अर्जेंटीना 0-2 से पीछे थी। 79वें मिनट में रोमेरो ने गोल कर वापसी की शुरुआत की और अगले 13 मिनट में टीम ने तीन गोल दागकर मैच पलट दिया। डिफेंस में उनके टैकल और इंटरसेप्शन ने कई मजबूत टीमों के हमले रोके। 5. जूलियन अल्वारेज, स्ट्राइकर स्विट्जरलैंड के खिलाफ क्वार्टर फाइनल एक्स्ट्रा टाइम तक खिंच गया था। 112वें मिनट में अल्वारेज ने बॉक्स के बाहर से शानदार गोल कर अर्जेंटीना को सेमीफाइनल का टिकट दिलाया। स्पेन के 5 गेमचेंजर 1. उनाई सिमोन, गोलकीपर स्पेन के फाइनल तक पहुंचने की सबसे बड़ी वजह उसका मजबूत डिफेंस रहा और उस डिफेंस की सबसे मजबूत कड़ी गोलकीपर उनाई सिमोन रहे। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ एक गोल खाया। फ्रांस के खिलाफ सेमीफाइनल में एमबाप्पे के कई शॉट रोके। उन्होंने सभी मैच मिलाकर 609 मिनट तक गोल नहीं खाने का रिकॉर्ड भी बनाया। 2. लामिन यमाल, राइट विंगर यमाल ने अपनी स्पीड और ड्रिब्लिंग से हर मुकाबले में डिफेंडरों को परेशान किया। फ्रांस के खिलाफ सेमीफाइनल में उन्होंने बॉक्स के अंदर फाउल हासिल किया, जिस पर मिले पेनल्टी को मिकेल ओयारजाबाल ने गोल में बदला। 3. मिकेल ओयारजाबाल, स्ट्राइकर स्पेन के सबसे भरोसेमंद फिनिशर ओयारजाबाल ने सेमीफाइनल में पेनल्टी पर गोल कर टीम को शुरुआती बढ़त दिलाई। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने पांच गोल और एक असिस्ट किया। 4. पॉ क्यूबार्सी, डिफेंडर 19 साल के क्यूबार्सी ग्रुप स्टेज के हर मिनट मैदान पर रहने वाले इकलौते टीनएजर रहे। उन्होंने 295 में से 290 पास पूरे किए। 16 बार गेंद रिकवर की और सिर्फ एक फाउल किया। एमबाप्पे और रोनाल्डो जैसे स्टार खिलाड़ियों के खिलाफ भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा। 5. पेड्रो पोरो, मिडफील्डर पोरो ने मिडफील्ड और अटैक के बीच सबसे मजबूत कड़ी का काम किया। छोटे-छोटे पास और बेहतरीन मूवमेंट से उन्होंने विपक्षी डिफेंस को लगातार तोड़ा। फ्रांस के खिलाफ सेमीफाइनल में दूसरा गोल कर स्पेन की फाइनल में जगह पक्की कर दी। ------------------------------------------------------- फुटबॉल वर्ल्ड कप से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… अर्जेंटीना फुटबॉल वर्ल्डकप फाइनल में, इंग्लैंड हारा; मेसी ने 2 गोल असिस्ट किए डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार फुटबॉल वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंच गया है। लियोनेल मेसी की टीम ने बुधवार रात को दूसरे सेमीफाइनल में इंग्लैंड को 2-1 से हराया। टीम 85 मिनट 0-1 से पिछड़ रही थी। उसके बाद आखिरी 7 मिनट में दो गोल दागे और जीत हासिल की। फाइनल में उसका मुकाबला 19 जुलाई को स्पेन से होगा। पढ़ें पूरी खबर

मेक्सिको में 7.4 तीव्रता का भूकंप, सुनामी का खतरा बढ़ा:10 लाख लोगों के लिए अलर्ट जारी, पड़ोसी देशों में भी महसूस हुए झटके

मेक्सिको में 7.4 तीव्रता का भूकंप, सुनामी का खतरा बढ़ा:10 लाख लोगों के लिए अलर्ट जारी, पड़ोसी देशों में भी महसूस हुए झटके

मेक्सिको के दक्षिणी राज्य चियापास के तट पर शुक्रवार को 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। इसके बाद करीब 10 लाख लोगों के लिए सुनामी का अलर्ट जारी किया गया है। अमेरिकी एजेंसी USGS के मुताबिक, भूकंप का केंद्र मेक्सिको के प्यूर्टो मडेरो शहर के पास था। यह 10 किलोमीटर की गहराई पर आया, जिससे आसपास के इलाकों में तेज झटकों की आशंका बढ़ गई है। US सुनामी वार्निंग सिस्टम ने इस क्षेत्र के लिए सुनामी का अलर्ट जारी किया है। 7.4 तीव्रता के भूकंप को 'मेजर' कैटेगरी में रखा जाता है, जो बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकते हैं। भूकंप के झटके मेक्सिको के पड़ोसी देश ग्वाटेमाला और अल साल्वाडोर में भी महसूस किए गए। फिलहाल किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की कोई रिपोर्ट नहीं है। सोशल मीडिया पर भूकंप से जुड़ा यह वीडियो वायरल है… 300 किमी के दायरे में सुनामी का खतरा अधिकारियों ने चेतावनी दी कि भूकंप के केंद्र से करीब 300 किलोमीटर के दायरे में खतरनाक सुनामी लहरें उठ सकती हैं। सुनामी अलर्ट मुख्य रूप से 3 इलाकों के लिए जारी किया गया है: चियापास का दक्षिणी प्रशांत तट ओआक्साका के तटीय इलाके ग्वाटेमाला से लगे प्रशांत तटीय क्षेत्र प्रशासन ने लोगों से समुद्र तट और निचले तटीय इलाकों से दूर रहने की अपील की है। मेक्सिको-ग्वाटेमाला सीमा पर स्थित सुचियाते में समुद्र के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। पिछले 30 दिनों में 22 भूकंप दर्ज भूकंप 'पैसिफिक रिंग ऑफ फायर' में आया, जो प्रशांत महासागर के चारों ओर फैला करीब 40 हजार किलोमीटर लंबा घोड़े की नाल के आकार का इलाका है। यह दुनिया का सबसे एक्टिव भूकंपीय क्षेत्र माना जाता है। यहां दुनिया के करीब 75% सक्रिय और निष्क्रिय ज्वालामुखी हैं और लगभग 90% भूकंप इसी क्षेत्र में आते हैं। पिछले 30 दिनों में इस इलाके में 22 भूकंप दर्ज किए गए हैं। इनमें शुक्रवार का 7.4 तीव्रता वाला भूकंप सबसे शक्तिशाली बताया जा रहा है। भूकंप के तुरंत बाद अधिकारियों ने कहा कि समुद्र में उठने वाली ऊंची और खतरनाक लहरें तटीय इलाकों में बाढ़ ला सकती हैं। लोगों से संभावित बाढ़, तेज समुद्री धाराओं और ऊंची लहरों को देखते हुए सतर्क रहने की अपील की गई है। हालांकि, अमेरिका के नेशनल सुनामी वार्निंग सेंटर ने साफ किया है कि अमेरिका के पश्चिमी तट, ब्रिटिश कोलंबिया और अलास्का के लिए सुनामी का कोई खतरा नहीं है। भूकंप क्यों आते हैं हमारी धरती की सतह मुख्य तौर पर 7 बड़ी और कई छोटी-छोटी टेक्टोनिक प्लेट्स से मिलकर बनी है। ये प्लेट्स लगातार तैरती रहती हैं और कई बार आपस में टकरा जाती हैं। टकराने से कई बार प्लेट्स के कोने मुड़ जाते हैं और ज्‍यादा दबाव पड़ने पर ये प्‍लेट्स टूटने लगती हैं। ऐसे में नीचे से निकली ऊर्जा बाहर की ओर निकलने का रास्‍ता खोजती है और इस डिस्‍टर्बेंस के बाद भूकंप आता है। ------------------------------- भूकंप से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… वेनेजुएला में फिर भूकंप के झटके, अब तक 1430 मौतें:करीब 3300 घायल, 51 हजार लापता; लोग खुद मलबा हटाकर अपनों को तलाश रहे दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में 25 जून को आए दो भूकंप के बाद स्थानीय समयानुसार शुक्रवार दोपहर को एक और भूकंप आया। देश के उत्तरी तट के पास आए इस भूकंप की तीव्रता 4.9 मापी गई है। रॉयटर्स के मुताबिक, राजधानी कराकास और माराके में भी झटके महसूस किए गए। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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