फीस में सिर्फ एक पौधा, 250 को बनाया आर्मी अफसर:ऑपरेशन सिंदूर के शूरवीरों के गुरु; महू के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल की अनोखी पाठशाला
AdminSeptember 5, 2026
शिक्षक दिवस पर गुरु की बात आते ही स्कूल की कक्षा, ब्लैकबोर्ड और किताबों की तस्वीर उभरती है। लेकिन महू में एक ऐसी पाठशाला है, जहां न फीस है, न एडमिशन फॉर्म। यहां युवाओं को आर्मी अधिकारी बनने का सपना दिखाने वाले गुरु हैं 81 वर्षीय रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल माधव गोविंद दातार। आर्मी से रिटायर होने के बाद दातार ने 2009 में युवाओं को SSB इंटरव्यू की मुफ्त तैयारी कराना शुरू किया। करीब 17 साल में उनके मार्गदर्शन से 250 युवा आर्मी अधिकारी बन चुके हैं। उनका दावा है कि कई शिष्य ऑपरेशन सिंदूर समेत महत्वपूर्ण सैन्य मिशनों में भूमिका निभा चुके हैं। शिष्य लड्डू लाते थे, कहा- पौधे लेकर आना दातार ने शुरुआत में ही तय कर लिया था कि वे बच्चों से कोई फीस नहीं लेंगे। उनका कहना है कि भगवान ने उन्हें इतना दिया है कि बच्चों से पैसे लेने की जरूरत नहीं। पहले चयन होने पर शिष्य उनके लिए लड्डू लेकर आते थे। जब लड्डू ज्यादा आने लगे तो उन्होंने कहा- अब मिठाई नहीं, एक पौधा लेकर आना। तब से सफल होने वाले युवा माता-पिता के साथ उनके घर पहुंचते हैं और एक पौधा भेंट करते हैं। दातार इन्हें अपने गार्डन में लगाते हैं। उनके लिए यही शिष्यों की सफलता की सबसे खूबसूरत निशानी है। SSB में रटे हुए जवाब नहीं चलते दातार की क्लास सिर्फ इंटरव्यू के सवाल-जवाब तक सीमित नहीं है। वे बच्चों को ईमानदारी से खुद को समझना और स्वतंत्र रूप से सोचना सिखाते हैं। उनका कहना है कि SSB में कुछ घंटों के लिए खुद को बदलकर पेश करना आसान नहीं है। बातचीत, व्यवहार और बॉडी लैंग्वेज से व्यक्ति की वास्तविकता सामने आ जाती है। जब किसी युवा से पूछा जाता है कि वह आर्मी अधिकारी क्यों बनना चाहता है तो दातार किसी तय जवाब की तलाश नहीं करते। कोई देशसेवा, कोई एडवेंचर, कोई आर्मी के सम्मान तो कोई सैलरी-पेंशन की बात करता है। उनके लिए जवाब का कारण नहीं, बल्कि उसका स्वाभाविक और ईमानदार होना ज्यादा जरूरी है। वे कहते हैं- बनावटी जवाब मत दो। किताबों से ज्यादा सोचने की ट्रेनिंग दातार का जोर स्वतंत्र रूप से सोचने और परिस्थितियों के अनुसार फैसला लेने की क्षमता विकसित करने पर है। उनका मानना है कि जिंदगी की हर समस्या का एक तय समाधान नहीं होता। इसलिए SSB की तैयारी के साथ युवाओं के व्यक्तित्व, व्यवहार और निर्णय लेने की क्षमता पर भी काम किया जाता है। महू का माहौल भी बनता है प्रेरणा महू में सेना की मौजूदगी बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणा का काम करती है। सड़क पर वर्दी में जाता कोई अधिकारी किसी बच्चे के मन में यह सवाल पैदा कर सकता है कि क्या मैं भी ऐसा बन सकता हूं? दातार के यहां देश के कई राज्यों से युवा तैयारी करने आते हैं। एक चयन, बदल जाती है परिवार की तस्वीर दातार बताते हैं कि कई युवाओं के लिए आर्मी अधिकारी बनना सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि परिवार की जिंदगी बदलने का मौका होता है। साधारण परिवार से आने वाला एक युवा अधिकारी बनता है तो घर की आर्थिक स्थिति और सामाजिक सम्मान बदलते हैं। छोटे भाई-बहनों के लिए भी नए रास्ते खुलते हैं। चयन के बाद भी कायम रहता है रिश्ता दातार और उनके शिष्यों का रिश्ता चयन के बाद खत्म नहीं होता। वर्ष 2009-10 के आसपास उनसे SSB की तैयारी करने वाले कई युवा आज सीनियर ऑफिसर बन चुके हैं। जब वे सीनियर कोर्स के लिए महू आते हैं तो अपने पुराने गुरु से मिलने जरूर पहुंचते हैं। दातार वर्ष 2006 में रिटायर हुए थे। उनके पास कई अच्छे नौकरी विकल्प थे, लेकिन उन्होंने अपना अनुभव युवाओं के मार्गदर्शन में लगाने का फैसला किया। दातार के अनुभव से मिल रही मदद सजल जाधव बताते हैं कि यहां SSB की तैयारी के साथ लीडरशिप स्किल्स विकसित करने पर भी काम होता है। ग्रुप डिस्कशन (GD) से लेकर चयन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों की तैयारी कराई जाती है और इसके लिए कोई फीस नहीं ली जाती। अनुभव और मार्गदर्शन से SSB की तैयारी में मदद मिलती है। साथ ही आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और व्यक्तित्व विकास जैसे गुण भी विकसित होते हैं।
Related News
शिवपुरी में छात्राओं के सामने साइकिल स्टंट:वीडियो वायरल होने पर पुलिस ने युवक को पकड़ा, भेजा जेल
ग्वालियर में 500 बच्चों को पढ़ा रहे रिटायर्ड बैंक मैनेजर:पत्नी के निधन के बाद गरीब बच्चों को पढ़ाना ही बना लिया जिंदगी का उद्देश्य
ट्रक ने सास-बहू समेत 3 महिलाओं को कुचला, मौत:मुरैना में कृष्ण जन्मोत्सव देखकर लौट रहीं थीं, बेकाबू ट्रक दुकानों में घुसा; ड्राइवर पकड़ा गया
राजगढ़ के बिट्टू की जिद ने दिल जीता:तैरना नहीं आता, फिर भी नदी साफ की; CM ने कहा- हमारा छोटा बिट्टू
Comments
No approved comments yet.
