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स्पेन ने 16 साल बाद फुटबॉल वर्ल्ड कप जीता:फाइनल में अर्जेंटीना को 1-0 से हराया, फेरन टोरेस ने एक्स्ट्रा टाइम में गोल दागा

Admin/July 19, 2026/5 min read/4 views
स्पेन ने 16 साल बाद फुटबॉल वर्ल्ड कप जीता:फाइनल में अर्जेंटीना को 1-0 से हराया, फेरन टोरेस ने एक्स्ट्रा टाइम में गोल दागा
स्पेन ने 16 साल बाद फुटबॉल वर्ल्ड कप का खिताब जीत लिया। टीम ने न्यूयॉर्क के न्यू जर्सी स्टेडियम में खेले गए फाइनल में 2022 की चैंपियन अर्जेंटीना को 1-0 से हराया। स्पेन के लिए एक्स्ट्रा टाइम में फेरन टोरेस ने गोल किया। इसी के साथ स्पेन ने 2010 के बाद दूसरी बार ट्रॉफी अपने नाम की। तब टीम ने नीदरलैंड को 1-0 से हराया था। मार्टिनेज ने 100 मिनट तक अकेले लड़ाई लड़ी अगर यह मुकाबला 90 मिनट तक बराबरी पर रहा तो इसकी सबसे बड़ी वजह अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज थे। स्पेन पूरे मैच में लगातार अटैक करता रहा। कभी लामिन यमाल ने बॉक्स के बाहर से शॉट लगाया, कभी ओयारजाबाल ने मौका बनाया तो कभी पेड्री और निको विलियम्स गोल के करीब पहुंचे। हर बार मार्टिनेज ने खुद को गेंद और गोलपोस्ट के बीच खड़ा कर दिया। कई बार ऐसा लगा कि स्पेन अब गोल कर देगा, लेकिन हर बार मार्टिनेज ने उसे रोक दिया। लेकिन फुटबॉल में लगातार दबाव आखिरकार असर दिखाता है। 106वें मिनट में निको विलियम्स का हेडर फेरन टोरेस तक पहुंचा और इस बार मार्टिनेज भी कुछ नहीं कर सके। एंजो का रेड कार्ड... और यहीं पलट गया फाइनल 90 मिनट तक अर्जेंटीना किसी तरह मुकाबले में बनी रही। टीम का पूरा भरोसा पेनल्टी शूटआउट पर था, लेकिन इंजरी टाइम में एंजो फर्नांडीज ने ऐसी गलती कर दी, जिसने पूरी बाजी बदल दी। पाउ क्यूबार्सी पर टैकल के बाद रेफरी ने एंजो को दूसरा यलो कार्ड दिखाया और फिर रेड कार्ड। अर्जेंटीना 10 खिलाड़ियों के साथ रह गई। इसके बाद स्पेन ने गेंद पर और ज्यादा कब्जा जमा लिया। मेरिनो चूके... टोरेस ने इतिहास लिख दिया 103वें मिनट में निको विलियम्स ने ऐसा क्रॉस डाला, जिसे देखकर स्पेनिश फैंस जश्न मनाने को तैयार हो गए थे। मिकेल मेरिनो को लगभग खाली गोल मिला, लेकिन उनका हेडर बाहर चला गया। तीन मिनट बाद वही निको विलियम्स फिर बाएं फ्लैंक से पहुंचे। इस बार उन्होंने बैक पोस्ट पर हेडर से गेंद फेरन टोरेस के सामने गिराई। फेरन टोरेस ने बिना एक पल गंवाए दाएं पैर से ऐसा शॉट लगाया कि गेंद सीधे नेट में जा समाई। यमाल ने मेसी की चमक फीकी कर दी यह फाइनल एक तरह से दो पीढ़ियों का मुकाबला भी था। एक तरफ 39 साल के लियोनेल मेसी थे, दूसरी ओर 20 साल के लामिन यमाल। मेसी से उम्मीद थी कि वे एक बार फिर बड़े मैच में कमाल कर दिखाएंगे, लेकिन स्पेन की मिडफील्ड और डिफेंस ने उन्हें कभी खुलकर खेलने का मौका ही नहीं दिया। दूसरी ओर यमाल लगातार अर्जेंटीना के डिफेंस पर हमला करते रहे। स्पेन की पहचान फिर बनी बॉल पजेशन स्पेन की पहचान हमेशा से गेंद पर नियंत्रण रखने वाली टीम की रही है। इस फाइनल में भी वही अंदाज दिखा। रोड्री ने मिडफील्ड में पूरे मैच की रफ्तार तय की। अर्जेंटीना को काउंटर अटैक का मौका ही नहीं मिला। स्पेन ने करीब 65% समय गेंद अपने पास रखी। आखिरी सीटी के बाद जश्न... और फिर लड़ाई रेफरी की अंतिम सीटी बजते ही स्पेनिश खिलाड़ी मैदान पर दौड़ पड़े। कोई घुटनों के बल बैठ गया, कोई आसमान की ओर देखने लगा, तो कोई अपने साथी खिलाड़ियों से लिपट गया। 16 साल का इंतजार खत्म हो चुका था। दूसरी ओर अर्जेंटीना के खिलाड़ियों की निराशा साफ दिखाई दे रही थी। कुछ देर बाद दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच नोकझोंक भी हुई, लेकिन मामला जल्द शांत हो गया। इसके बाद ट्रॉफी स्पेन के कप्तान के हाथों में पहुंची और पूरा स्टेडियम 'वीवा एस्पाना' (स्पेन जिंदाबाद) के नारों से गूंज उठा। एम्बाप्पे ने जीता गोल्डन बूट, मेसी दूसरे नंबर पर रहे फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 में सबसे ज्यादा गोल फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे ने किए। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 10 गोल और 4 असिस्ट के साथ गोल्डन बूट अपने नाम किया। अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी 8 गोल और 4 असिस्ट के साथ दूसरे स्थान पर रहे। ड्रॉ से शुरुआत, जीत के साथ खत्म हुआ स्पेन का सफर स्पेन ने वर्ल्ड कप की शुरुआत केप वर्डे के खिलाफ ड्रॉ से की थी, लेकिन इसके बाद टीम ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। ग्रुप स्टेज में सऊदी अरब को 4-0 और उरुग्वे को 1-0 से हराकर नॉकआउट में जगह बनाई। इसके बाद स्पेन ने लगातार ऑस्ट्रिया, पुर्तगाल, बेल्जियम और फ्रांस जैसी मजबूत टीमों को हराया। एम्बाप्पे के नाम सबसे ज्यादा वर्ल्ड कप गोल फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 ने सबसे बड़ा रिकॉर्ड गोल स्कोरिंग लिस्ट में देखा। फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे ने 10 गोल के साथ अपना कुल वर्ल्ड कप गोल आंकड़ा 22 तक पहुंचाया और जर्मनी के मिरोस्लाव क्लोजे (16) का रिकॉर्ड पीछे छोड़ते हुए इतिहास के सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए। अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी भी 21 गोल के साथ क्लोजे से आगे निकलकर दूसरे स्थान पर पहुंच गए। फुटबॉल वर्ल्ड कप के सभी चैंपियन दोनों टीमों की स्टार्टिंग-11 स्पेन: उनाई सिमोन (गोलकीपर), पेड्रो पोरो, एमेरिक लापोर्टे, पाउ क्यूबार्सी, मार्क कुकुरेला, फेबियन रुइज, एलेक्स बाएना, रोड्री (कप्तान), दानी ओल्मो, लामिन यामाल, मिकेल ओयारजाबाल। अर्जेंटीना: एमिलियानो मार्टिनेज (गोलकीपर), निकोलस टैग्लियाफिको, गोंजालो मोंटिएल, लिसांद्रो मार्टिनेज, क्रिस्टियन रोमेरो, रोड्रिगो डी पॉल, निको गोंजालेज, एलेक्सिस मैक एलिस्टर, एंजो फर्नांडेज, जूलियन अल्वारेज, लियोनेल मेसी (कप्तान)। भास्कर नॉलेजः स्पेन का फुटबॉल मॉडल बना जीत की फैक्ट्री 1. जीत की शुरुआत बचपन से: स्पेन में 6–7 साल की उम्र से बच्चों को क्लब अकादमियों में ट्रेनिंग मिलनी शुरू हो जाती है। देशभर में हजारों कोच एक तय तकनीकी मॉडल पर खिलाड़ियों को तैयार करते हैं। हर उम्र वर्ग (U-12, U-15, U-17, U-19, U-21) की राष्ट्रीय टीम एक जैसी खेलने की शैली अपनाती है, इसलिए सीनियर टीम में पहुंचने पर खिलाड़ियों को अलग ढंग से ढलना नहीं पड़ता। 2. अकादमियां, जो सुपरस्टार बनाती हैं: बार्सिलोना की ला मासिया और रियल मैड्रिड की ला फाब्रिका दुनिया की सबसे सफल फुटबॉल अकादमियों में गिनी जाती हैं। इन्हीं अकादमियों से जावी, इनिएस्ता, बुस्केट्स, कार्लेस पुयोल, इकर कैसियास, राउल जैसे दिग्गज निकले। यही मॉडल स्पेन की राष्ट्रीय टीम की रीढ़ माना जाता है। 3. दुनिया की सबसे मजबूत लीग में शामिल: ला लीगा दुनिया की सबसे लोकप्रिय फुटबॉल लीग में गिनी जाती है। रियल मैड्रिड और बार्सिलोना जैसे क्लबों ने मिलकर दर्जनों यूरोपीय खिताब जीते हैं। लियोनेल मेसी ने अपने क्लब करियर का अधिकांश हिस्सा बार्सिलोना के साथ इसी लीग में खेला और 474 गोल कर लीग के सर्वकालिक शीर्ष स्कोरर बने। स्पेन की पहचान: टिकी-टका फुटबॉल स्पेन की पहचान टिकी-टका शैली से है। इसमें छोटे-छोटे पास, गेंद पर लंबे समय तक कब्जा और अटैक करना शामिल है। इसी शैली की बदौलत स्पेन ने 2008 यूरो, 2010 फीफा वर्ल्ड कप और 2012 यूरो लगातार जीते। फाइनल से जुड़े अपडेट्स के लिए LIVE ब्लॉग से गुजर जाइए…

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